हरदा जिले में यूरिया खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान रातभर अलाव जलाकर गोदामों के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि जिले में मांग के मुकाबले 80% यूरिया की सप्लाई हो चुकी है, फिर भी किसानों के हाथ खाली हैं। डीएमओ और एमपी एग्रो के गोदामों पर लंबी कतारें लगी हैं। इसी अव्यवस्था को खत्म करने के लिए प्रशासन अब नए साल से ‘ई-टोकन’ प्रणाली लागू करने जा रहा है। मोबाइल पर आएगा मैसेज, समय और केंद्र होगा तय कृषि विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था में किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। 1.20 लाख किसान परेशान, कहां जा रही खाद? जिले में करीब 1 लाख 20 हजार किसान 1 लाख 92 हजार एकड़ में खेती करते हैं। गेहूं, चना, मक्का और सोयाबीन की फसलों के लिए यूरिया की भारी मांग है। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब 80% खाद आ चुकी है, तो वह जा कहां रही है? किसान सहकारी समितियों और निजी दुकानों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। नए साल से लागू होगी व्यवस्था कृषि उप संचालक जेएल कास्दे ने बताया कि भोपाल में हुई बैठक के बाद ई-टोकन प्रणाली को हरी झंडी मिल गई है। यह सुविधा नए साल से शुरू हो जाएगी। इसका उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और किसानों को ब्लैकमेलिंग से बचाना है। देखिए तस्वीरें…


