हरियाणा के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट की मंगेतर दिल्ली में टीचर:पार्थिव देह से पूछती रही- बेबी, तू आया नहीं मेरे लिए, तू तो बोलके गया था

जगुआर क्रैश में शहीद हुए हरियाणा के फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव के अंतिम संस्कार के समय मंगेतर सानिया का वीडियो सामने आया है। इसमें वह सिद्धार्थ के पार्थिव शरीर रखे बॉक्स से लिपटी हुई हैं। वह सिद्धार्थ के सिर की तरफ रखी फोटो से पूछती हैं- ‘बेबी, तू आया नहीं मेरे लिए, तू तो बोलके गया था, मैं आऊंगा तुझे लेने।’ इस दौरान वह बॉक्स को खटखटाती हुई भी नजर आ रही हैं। यह वीडियो उस वक्त का है, जब सिद्धार्थ की पार्थिव देह रेवाड़ी के सेक्टर-18 स्थित नए घर में पहुंची थी। इस दौरान एयरफोर्स के जवानों और परिजनों ने सानिया को वहां से हटाया। सिद्धार्थ की 10 दिन पहले ही सानिया से सगाई हुई थी। वह दिल्ली के प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। चंद दिनों में सिद्धार्थ से वह इतनी अटैच कैसे हो गईं, जिससे सिद्धार्थ के परिवार वाले भी हैरान हैं। मंगेतर सानिया के शहीद के अंतिम दर्शन करते 3 PHOTOS… MSc और Bed पढ़ीं सानिया, अरेंज मैरिज होनी थी
सानिया मूल रूप से रेवाड़ी जिले के गढ़ी बोलनी गांव की रहने वाली हैं। सानिया ने MSc और Bed की पढ़ाई की है। अब वह दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। उनके पिता एक कंपनी में सप्लाई चेन संभालते हैं। सिद्धार्थ के साथ उसकी अरेंज मैरिज हो रही थी। पारिवारिक मित्र ने ही यह रिश्ता कराया था। 23 को सगाई, 31 को लौटे, 2 अप्रैल को शहीद
फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ सानिया से रिश्ता तय होने के बाद 20 मार्च को छुट्‌टी पर आए थे। इसके बाद 23 मार्च को रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच में दोनों की सगाई हुई। 31 मार्च को सिद्धार्थ अपनी ड्यूटी पर गुजरात के जामनगर में लौट गए। 2 अप्रैल की रात को वह को-पायलट मनोज के साथ फाइटर जैट जगुआर लेकर निकले, लेकिन वह क्रैश हो गया। इसमें सिद्धार्थ शहीद हो गए। दोनों की शादी 2 नवंबर को होनी थी, जिसके लिए घर में तैयारियां भी चल रही थीं। शादी के लिए ही परिवार ने भालखी माजरा गांव छोड़ रेवाड़ी के सेक्टर-18 में नया घर खरीदा था। मगर, वहां दुल्हन की डोली की जगह सिद्धार्थ की पार्थिव देह आई। सिद्धार्थ एयरफोर्स में फाइटर पायलट भर्ती हुए थे
सिद्धार्थ ने साल 2016 में NDA की परीक्षा पास की थी। 3 साल की ट्रेनिंग के बाद सिद्धार्थ ने फाइटर पायलट के तौर पर एयरफोर्स जॉइन की। एयरफोर्स में ट्रेनिंग समेत 5 साल की सर्विस पूरी होने के बाद वह 2020 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट बन गए। सिद्धार्थ परिवार की चौथी पीढ़ी से थे, जो फौज में थे। इससे पहले उनके पड़दादा डालूराम ब्रिटिश शासन के अधीन आती बंगाल इंजीनियर्स में थे। सिद्धार्थ के दादा रघुवीर पैरामिलिट्री फोर्स में थे। इसके बाद इनके पिता सुशील यादव भी एयरफोर्स में रहे। एयरफोर्स ने की थी सिद्धार्थ की बहादुरी की तारीफ
सिद्धार्थ 31 मार्च को ड्यूटी पर लौटने के बाद 2 अप्रैल को जगुआर फाइटर जेट लेकर जामनगर एयरफील्ड से नाइट मिशन पर रवाना हुए थे। उनके साथ को-पायलट मनोज भी थे। रात करीब साढ़े 9 बजे जामनगर शहर से 12 किमी दूर सुवारडा गांव के पास उनका जगुआर क्रैश हो गया था। विमान के जमीन से टकराने के बाद उसमें आग लग गई, जिससे मलबा दूर तक फैल गया। क्रैश होने से पहले सिद्धार्थ ने साथी मनोज को इजेक्ट करा दिया। वह खुद भी इजेक्ट कर सकते थे, लेकिन वह चाहते थे कि विमान को आबादी से दूर ले जाएं। वह इसमें तो कामयाब हो गए, लेकिन खुद भी शहीद हो गए। **************** यह खबर भी पढ़ें… हरियाणा के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट की कहानी:मंगेतर को घुटनों पर बैठ रिंग पहनाई थी; यूनिफॉर्म पहन स्कूल आने का वादा अधूरा रहा हरियाणा के रेवाड़ी के शहीद फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव सगाई के 10 दिन बाद शहीद हो गए। उन्होंने सगाई के दिन घुटनों पर बैठकर मंगेतर को इंगेजमेंट रिंग पहनाई थी। वहीं सिद्धार्थ का यूनिफॉर्म पहनकर अपने स्कूल जाने का वादा भी अधूरा रह गया। उन्हें स्कूल से बहुत लगाव था। पूरी खबर पढ़ें…

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