हरियाणा में मधुमक्खी के जहर से भी कमाई:सरकारी मदद, फ्री में कलेक्शन, ₹75 हजार तक मंथली इनकम; 30 किसान काम कर रहे

हरियाणा में मधुमक्खी पालन अब सिर्फ शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसान बी-वेनम (मधुमक्खी के जहर) से भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। बी-वेनम की कीमत 2 हजार से 12 हजार रुपए प्रति ग्राम तक होती है, जिसका उपयोग फार्मा और कॉस्मेटिक कंपनियां दर्द निवारक दवाओं और एंटी-एजिंग क्रीम बनाने में करती हैं। देश के अलावा साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, जॉर्जिया, कुरोसिया, फ्रांस, टर्की, डेनमार्क, स्विटजरलैंड जैसे देशों में इसकी खूब डिमांड है। 500 बी-बॉक्स से 75 हजार रुपए तक मंथली इनकम ले सकता है। खास बात यह है कंपनियां बी-कीपर के पास फ्री में सेटअप लगाकर बी-वेनम कलेक्ट करती हैं। किसान को केवल मधुमक्खी पालन करना होता है। इससे किसान बिना किसी अतिरिक्त खर्च के फायदा कमा सकते हैं। हरियाणा में 30 किसान इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। इस नई तकनीक से मधुमक्खी पालकों की आय में इजाफा होगा और किसान की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। इसमें नेशनल बी-बोर्ड और बागवानी विभाग भी सहयोग करता है। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए कैसे इस प्रोजेक्ट के बारे में… बी-वेनम कलेक्ट करना टफ प्रोसेस, मार्किट वैल्यू ज्यादा
बी-वेनम निकालने का प्रोसेस थोड़ा टफ होता है। 25 से 30 बॉक्सेज से 1 ग्राम बी-वेनम निकलता है। बी-वेनम में मेलेटिन नाम का पदार्थ होता है और उसी पर मार्केट वैल्यू डिपेंड करती है। जितने प्रतिशत मेलेटिन होगा, उतनी ही मार्केट वैल्यू ज्यादा होगी। बी-वेनम 2 हजार से शुरू होकर 12 हजार रुपए प्रति ग्राम तक बिक जाता है। इसी मेलेटिन का यूज फार्मा और कॉस्मेटिक कंपनियां करती हैं। हालांकि इस बी-वेनम में कैपेमिन कंटेंट भी होता है, लेकिन उसको कम यूज किया जाता है। फ्री में लगाती है कंपनी सेटअप
बी-वेनम का इस्तेमाल फार्मास्युटिकल कंपनियां पेन रिलीफ दवाइयां और कॉस्मेटिक कंपनियां एंटी एजिंग क्रीम बनाने में करती हैं। इसमें कंपनी बी-कीपर के पास जाती है और फ्री में बी-वेनम निकालने का सेटअप लगाती है। जब बी-वेनम तैयार हो जाता है तो कंपनी की टीम इसे कलेक्ट करके ले जाती है। अगर कोई किसान 100 बॉक्स से मधुमक्खी पालन करता है तो वह महीने के 12 से 17 हजार रुपए कमा सकता है। अगर किसी के पास 500 बी-बॉक्स है तो वह 75 हजार रुपए तक मंथली इनकम ले सकता है। खास मशीनों से निकाला जाता है बी-वेनम
कंपनी के हेड संजय तक्षक बताते है कि हमने बी-वेनम के लिए एक मशीन बनाई है। मशीन के सेटअप में प्लास्टिक का डॉम्ब, पैनल, कांच की स्लाइड और एक मशीन होती है। पैनल में कांच की स्लाइड फिट करके उसके मधुमक्खी के बॉक्स पर रख दिया जाता है और ऊपर से डॉम्ब ढक दिया जाता है। एक मशीन पर 10 पैनल सेट किए जा सकते है। पैनल में छोटी-छोटी रॉड लगी होती है, जिनमें माइक्रो करंट होता है। इससे मधुमक्खियों को सिर्फ हल्का सा झटका लगता है। जैसे ही बॉक्स से मधुमक्खी बाहर आती है और पैनल पर बैठती है तो झटके की वजह से मधुमक्खी अपना वेनम कांच पर छोड़ देती है। आगे बताया कि मधुमक्खी पालन करने वालो में भ्रांतियां रहती है कि इससे मधुमक्खी मर जाती है और उसका कांटा निकल जाता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता। अगर, मधुमक्खी किसी को डंक मारती है तो उस दौरान उसका कांटा मानव शरीर में फंस जाता है और उसकी वजह से वह मर जाती है, लेकिन मशीन में सिर्फ वह अपना जहर छोड़ती है, कांटा नहीं। मधुमक्खी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। शहद के साथ-साथ बी-वेनम से भी होगी इनकम
संजय बताते है कि मधुमक्खी पालक बी-वेनम कांसेप्ट की तरफ बढ़ रहे है, क्योंकि इसके रिजल्ट अच्छे है और भविष्य में इसकी डिमांड बढ़ने वाली है, क्योंकि मधुमक्खी पालक सिर्फ शहद का ही प्रोडक्शन ले पाते है। शहद का रेट भी उनको सही नहीं मिल पाता। इसके अलावा शहद बेचने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अगर, मधुमक्खी पालक बी-वेनम कॉन्सेप्ट अपनाते है तो वह देश के लिए भी अच्छा है और पॉलिनेशन के लिए भी अच्छा है। मधुमक्खी पालक शहद से तो कमाई कर ही सकते है, साथ ही बी-वेनम से भी अच्छी इनकम जनरेट कर सकते है। संजय बताते है कि नेशनल बी-बोर्ड और बागवानी विभाग का सहयोग भी मिल रहा है। आईबीडीसी रामनगर में भी बी-कीपरों को ट्रेनिंग दी है और आगे भी प्लान है कि बी-कीपर को जागरूक करे और ट्रेनिंग दे और उनको आगे बढ़ाया जा सके। कम लागत, ज्यादा मुनाफा, लगातार अपना रहे किसान
यमुनानगर के किसान सुभाष कंबोज बताते हैं, ‘उन्होंने 1500 से 2000 बॉक्स लगा रखे हैं। 100 बॉक्स पर 12 हजार से 15 हजार पर मंथ कमाया जा सकता है। मशीन लगाने में कोई खर्च नहीं आता, वह कंपनी फ्री लगाती है।’ वहीं, भिवानी के सतीश त्रिपाठी ने बताया- उन्होंने 400 बॉक्स लगा रखे हैं और वे 36 हजार रुपए मंथली कमा रहे हैं। इसके अलावा एक बॉक्स से 4 किलोग्राम शहद आता है, जो 400 रुपए तक बिक जाता है। यह स्टार्टिंग, सैंपलिंग और टेस्टिंग फेस है, इसलिए हजार रुपए देते हैं। जब भी कोई बल्क ऑर्डर आएगा तो उसके बाद 2 से ढाई हजार तक जा सकती है।’

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