हर शुक्रवार एक पंचायत या गांव की कहानी, आज पढ़िए लहसोड़ा गांव के बारे में

खंडार तहसील में लहसोड़ा गांव बसा हुआ है। यह गांव जिला मुख्यालय सवाई माधोपुर से 22 किमी दूर दक्षिण में स्थित है। इस गांव की स्थापना के पीछे एक रहस्यमयी राज छिपा हुआ है जिसका बहुत कम लोगों को ज्ञान है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्री राम ने अपनी पत्नी सीता का त्याग कर दिया था तो उसी समय सीता जी ने सवाई माधोपुर में आकर अपना निवास स्थान बनाया जिसके कारण सवाई माधोपुर में सीता माता का प्रसिद्ध स्थल भी बना हुआ है। सीता जी के दोनों बेटे लव ओर कुश इन्हीं जंगलों में विचरण करते थे। अपने घोड़े को यही बांधा करते थे। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री राम व सीता जी के बेटे लव ने अपने नाम को साक्षी मानकर अपने नाम पर इस गांव लहसोड़ा की स्थापना की। कुश ने कुस्तला गांव बसाया। इस गांव के नजदीक ही 100 फीट ऊंचाई से बहने बाला झोझेश्वर का झरना भी है जो प्राकृतिक सौंदर्यता के साथ धार्मिक पर्यटन का केन्द्र भी है। यहां वर्षों पुराना लक्ष्मीनाथ मंदिर भी है जहां भक्त अपनी मन्नतें मांगते हैं। लहसोड़ा गांव की स्थानीय भाषा हिंदी है। भौगोलिक दृष्टि से भी लहसोड़ा का बहुत महत्व है। खंडार से सीधे लहसोड़ा होते हुए बूंदी का रास्ता नजदीक है। इस गांव से होकर जाने पर राहगीरों को 25 किलोमीटर की दूरी से राहत मिलती है। इस गांव के अधिकतर ग्रामीणों के लिए आजीविका का स्रोत कृषि व पशुपालन है। जनसंख्या : 4 हजार साक्षरता: 67 प्रतिशत जिला मुख्यालय से दूरी: 22 किमी कनेक्टिविटी : सिर्फ सड़क व्यवसाय : खेत​​ी, पशुपालन पहचान : लक्ष्मीनाथ मंदिर, खेड़ा पति हनुमान जी का मंदिर ।

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