भास्कर न्यूज | दंतेवाड़ा अबूझमाड़ क्षेत्र में बहने वाली इंद्रावती नदी हर साल दर्जनों ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। पर्याप्त पुल और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था के अभाव में मजबूरी में ग्रामीण लकड़ी की छोटी-छोटी डोंगियों से नदी पार करते हैं, जिसमें हर साल 10 से अधिक लोगों की मौत हो रही है। कलेक्टर संबित मिश्रा ने डोंगी पर प्रतिबंध लगाने की बात कही है। बीते कुछ वर्षों में लगातार हादसों के बावजूद स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। लगभग 5,000 वर्ग किलोमीटर में फैला अबूझमाड़ क्षेत्र नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों के बीच स्थित है। घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह इलाका लंबे समय तक बाहरी दुनिया से कटा रहा है। यहां 230 से अधिक गांव हैं, जिनमें से कई आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इंद्रावती नदी इन गांवों के लिए जीवन रेखा भी है और सबसे बड़ा खतरा भी। अबूझमाड़ को जोड़ने के लिए छिंदनार, करका घाट, बेदरे और फुंडरी में पुल निर्माण प्रक्रिया में हैं, लेकिन क्षेत्र इतना विस्तृत है कि केवल चार पुलों से राहत नहीं मिल पा रही। कई गांवों से पुलों की दूरी 20 से 30 किलोमीटर तक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक नए पुल, स्थायी बोट सेवा और घाटों पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम नहीं होते, तब तक इंद्रावती पर हर सफर मौत से जंग बना रहेगा। अबूझमाड़ के विकास के दावों के बीच यह सच्चाई है कि आज भी यहां के लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं। एकबार फिर कमी उजागर : बुधवार रात इंद्रावती में डोंगी पलटने से 4 लोग डूब गए। गुरुवार को दो शव और शुक्रवार को एक शव बरामद किया गया, जबकि चौथे की तलाश जारी है। यह हादसा एक बार फिर सिस्टम की कमियों को उजागर करता है। कलेक्टर संबित मिश्रा ने बताया कि चार मोटर बोट की व्यवस्था कर दी गई है, लकड़ी की डोंगियों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है, घाटों पर लाइफ जैकेट उपलब्ध कराए जाएंगे और बोट संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। भैरमगढ़ जनपद सीईओ अभिषेक तंबोली ने भी स्व सहायता समूहों के माध्यम से बोट संचालन की तैयारी की बात कही है। उसपरी घाट सबसे खतरनाक माना जा रहा है। यहां छोटी लकड़ी की डोंगियों में 7 से 8 लोग बैठकर नदी पार करते हैं। तेज बहाव और लहरों के कारण डोंगियां अक्सर पलट जाती हैं। प्रशासन को पता होने के बावजूद यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। पिछले पांच साल में केवल उसपरी घाट पर ही 7 बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें 8 लोगों की मौत दर्ज की गई है। अबूझमाड़ के उतला, बोड़गा, डूंगा, पीढियाकोट, पालेवाया, रेकावाया सहित दो दर्जन से अधिक गांवों के लोग हर शुक्रवार को भैरमगढ़ साप्ताहिक बाजार पहुंचने के लिए डोंगी से इंद्रावती पार करते हैं। नमक, राशन, दवा और अन्य जरूरी सामान के लिए भी यही एकमात्र रास्ता है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भी नदी पार करना मजबूरी है।


