गांधीनगर मोड़ स्थित शंकर मिष्ठान भंडार से गाजर का हलवा खाने के बाद बीमार पड़े पुलिसकर्मियों का मामला अब सिस्टम की लापरवाही का हलवा बन गया। घटना को 40 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक फूड सैंपल की जांच रिपोर्ट नहीं आई। हैरानी की बात यह है कि जिस हलवे से फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई गई थी, उसका सैंपल ही नहीं लिया गया था। अब बिना जांच पूरी हुए ही सील किए गए मिष्ठान भंडार को फिर खोल दिया गया। इस पूरे मामले ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 12 दिसंबर 2025 को पुलिस मुख्यालय के अधिकारी और स्टाफ ने शंकर मिष्ठान भंडार से गाजर का हलवा और समोसे मंगवाए थे। खाना खाने के कुछ समय बाद 10 पुलिसकर्मियों की तबीयत बिगड़ गई। जी मिचलाना, पेट दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायत पर सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 6 कांस्टेबल-हैड कांस्टेबल, 1 एएसआई, 3 सब-इंस्पेक्टर बीमार हुए थे। बड़ा सवाल- मिलावट किसमें? खाद्य विभाग के सिस्टम या हलवे में सूचना मिलते ही सीएमएचओ जयपुर प्रथम डॉ. रवि शेखावत के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा टीम सक्रिय हुई। एफएसओ वीरेंद्र कुमार ने शंकर मिष्ठान भंडार पर छापा मारा, दुकान को सील किया और तीन खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए। अब एफएसओ का कहना है कि टीम के पहुंचने तक दुकान में गाजर का हलवा मौजूद नहीं था, इसलिए हलवे का सैंपल लिया ही नहीं जा सका। पुलिसकर्मियों के पास बचे हलवे अथवा उनकी उल्टी के सैंपल लेने के सवाल पर भी अधिकारियों ने इंकार कर दिया। जांच रिपोर्ट अब तक नहीं मिली, दुकान कैसे खुली?
घटना के 40 दिन बाद भी लैब रिपोर्ट नहीं आई, लेकिन शंकर मिष्ठान भंडार दोबारा खुल चुका है। भास्कर रिपोर्टर ने जब दुकान संचालकों से सवाल किया तो उनका कहना था कि सीएमएचओ के निर्देशन में ही दुकान खोली है। दुकान जनहित में सील, लेकिन जवाबदेही नदारद खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि दुकान में फूड सेफ्टी की अनियमितताएं पाई गई थीं, इसलिए जनहित में सील किया गया था। लेकिन, रिपोर्ट नहीं आने से अब तक यह तय नहीं किया गया कि फूड पॉइजनिंग किस चीज से हुई। न दोष तय हो पाया और ना ही जिम्मेदारी। प्रदेश में हर चौथा सैंपल फेल, जयपुर प्रथम ने तो जुर्माना तक नहीं लगाया


