हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल:3.9 करोड़ से बनेगी नई कैथ लैब, रोज 50 एंजियोग्राफी हो सकेगी

हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल में मरीजों की बाइपास सर्जरी तो शुरू नहीं हो पाई है, लेकिन नई कैथ लैब जरूर लग रही है। उसके बाद रोज औसत 50 मरीजों की एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर लगाए जा सकेंगे। पीबीएम परिसर स्थिति हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल में वर्तमान में एक ही कैथ लैब है, जिस पर सुबह से रात तक रोज औसत 25 से 30 मरीजों की एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, स्टेंट और पेस मेकर लगाए जाते हैं। करीब इतने ही मरीजों की वेटिंग रहती है। हॉस्पिटल को 2022 में सेंटर फॉर एक्सीलेंस का दर्जा देने के बाद एक और कैथ लैब लगाने की योजना थी। पिछले साल फरवरी में राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी की बैठक में इसके लिए करीब चार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत मानते हुए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव पेश किए गए थे। यह बजट इस साल 31 मार्च तक खर्च करना है। कैथ लैब के लिए टेंडर कर दिए गए हैं। इसके स्टॉलेशन पर 3 करोड़ 90 लाख रुपए की लागत आंकी गई है। संभवतया अप्रैल से इसे लगाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. गुंजन सोनी ने बताया कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हार्ट हॉस्पिटल में तीन कैथ लैब की जरूरत है। पुरानी कैथ लैब आउट ऑफ ऑर्डर होने के कारण वर्तमान में एक ही कैथ लैब से काम चलाना पड़ रहा है। नई कैथ लैब इंस्टॉल होने के बाद मरीजों को तत्काल उपचार मिल सकेगा। वेटिंग भी खत्म होगी। गौरतलब है ​कि गंगाशहर के पवन बैद की मौत भी हार्ट अटैक से हुई थी। प्री मेच्योर कोरोनरी आर्टरी के केस इसलिए बढ़े प्री मेच्योर कोरोनरी आर्टरी के केस बढ़ रहे : डॉ. पिंटू नाहटा हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल में प्री मेच्योर कोरोनरी आर्टरी के केस बढ़ रहे हैं। कोरोना के बाद 30 से 40 वर्ष की आयु वाले युवाओं में यह प्रवृति देखने को मिल रही है। इसके कारण तत्काल मौतें भी हो रही हैं। चार सौ रोगियों के ओपीडी में 25 से 30 प्रतिशत प्री मेच्योर कोरोनरी आर्टरी के केस होते हैं। शेष 70 प्रतिशत केस 60 से अधिक उम्र वाले हैं, जो मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर सहित हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। नई कैथ लैब लगने के बाद मरीजों का उपचार तत्काल हो सकेगा। उन्हें इंतजार नहीं करना होगा। रोज 400 मरीज आउटडोर में आ रहे, बेड कम हार्ट हॉस्पिटल के आउटडोर में रोज 400 मरीज आ रहे हैं। करीब 72 बेड की क्षमता वाले इस हॉस्पिटल में दो मरीज भर्ती होते हैं। बेड कम होने के कारण मरीजों को जमीन पर भी लेटना पड़ता है। दरअसल हॉस्पिटल दो ब्लॉक में बंटा हुआ है। बी ब्लॉक खाली रहता है। समाजसेवियों का कहना है कि बी ब्लॉक में अतिरिक्त बेड लगाने चाहिए, जिससे मरीजों को परेशानी ना हो। हर महीने औसत दस हजार मरीजों को ओपीडी और एक हजार से डेढ़ हजार मरीजों को आईपीडी रहता है।

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