भिंड जिले की फूप पुलिस एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गई है। थाने के लॉकअप में एक ही परिवार के 5 सदस्यों के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट करने के आरोप में पीड़ित पक्ष ने अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामला इतना गंभीर है कि मेडिकल जांच में एक युवक की उंगली में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। पीड़ितों ने पुलिस पर झूठा केस बनाने और थाने में थर्ड डिग्री टॉर्चर देने का आरोप लगाते हुए प्राइवेट परिवाद दायर किया है। कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए पुलिस से जांच प्रतिवेदन तलब किया है। चलने की हालत में नहीं था आरोपी घटना 21 नवंबर की है। फूप पुलिस ने प्रमोद शर्मा उर्फ कल्लू, दीपक शर्मा और उनके परिवार के तीन अन्य लोगों पर शासकीय कार्य में बाधा और मोबाइल छीनने का केस दर्ज कर गिरफ्तार किया था। 22 नवंबर को जब पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, तो प्रमोद शर्मा के शरीर पर गंभीर चोटें थीं और वह चलने में भी असमर्थ थे। कोर्ट ने तत्काल मेडिकल बोर्ड से जांच के आदेश दिए थे। हैरानी की बात यह है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी मेडिकल रिपोर्ट 22 दिन बाद तैयार हो सकी। सूत्रों के मुताबिक, सेकंड मेडिकल रिपोर्ट में दीपक शर्मा की उंगली में फ्रैक्चर की बात सामने आई है। पुष्टि के लिए अब ग्वालियर मेडिकल कॉलेज से थर्ड ओपिनियन मांगा गया है। 9 जनवरी को होगी अगली सुनवाई पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने 24 दिसंबर को कोर्ट में परिवाद दायर किया। पीड़ितों का कहना है कि वे निर्दोष हैं और पुलिस ने अपनी खुन्नस निकालने के लिए उन्हें झूठे केस में फंसाकर पीटा है। अधिवक्ता हिमांशु शर्मा ने बताया कि जेएमएफसी न्यायालय ने परिवाद को सुनवाई योग्य माना है और अगली सुनवाई 9 जनवरी को तय की है।


