ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि जांच की दिशा तय करना या सीधे चार्जशीट दाखिल करने का आदेश देना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि विवेचना पुलिस का विशिष्ट कार्य है और अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। यह आदेश जनकगंज थाने में धारा 109 के तहत दर्ज एक एफआईआर की जांच के संबंध में पारित किया गया। याचिकाकर्ता आदेश परिहार ने आरोप लगाया था कि पुलिस सूचना के बावजूद आरोपियों को गिरफ्तार करने और चालान पेश करने की दिशा में कार्रवाई नहीं कर रही है। कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(1) का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस का दायित्व है कि वह बिना अनावश्यक विलंब के जांच पूरी करे और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करे। हाईकोर्ट ने विवेचना अधिकारी को दो माह के भीतर जांच पूरी कर ठोस कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यदि याचिकाकर्ता को जांच से कोई असंतोष रहता है, तो वह संबंधित मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।


