हाईकोर्ट ने कोतवाल व एसपी से मांगा स्पष्टीकरण:एसपी के वाहन को टक्कर मारने वाली एफआईआर में हाईकोर्ट सख्त, 28 जनवरी को सुनवाई पर पेश होने के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश फरजंद अली की एकलपीठ ने बाड़मेर पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा व कोतवाली थानाधिकारी लेखराज सियाग को व्यक्तिगत रूप से स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है। याचिकाकर्ता शैलेन्द्र सिंह के खिलाफ दर्ज एफआईआर संख्या 175/2024 पर अगली कार्रवाई पर रोक लगा दी है। याचिका में बताया गया कि याची के विरुद्ध एक एफआईआर बाड़मेर के पुलिस अधीक्षक के सरकारी वाहन पर कथित टक्कर के मामले में दर्ज की गई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि शैलेन्द्र सिंह ने अपने वाहन से जानलेवा हमला किया। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में पेश वीडियो फुटेज और तस्वीरों की जांच के बाद पाया कि वाहनों के बीच कोई टक्कर नहीं हुई थी और यह मामला झूठे सबूत गढ़ने का प्रतित होता है। कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं 182, 193, और 211 के तहत अपराध की संभावना को लेकर पुलिस अधीक्षक और कोतवाली थाना प्रभारी को शपथ पत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण के लिए उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थितियों में भी सरकारी अधिकारियों को मामले गढ़ने या झूठे साक्ष्य तैयार करने की अनुमति नहीं है। उन्हें कानून को हाथ में लेने और व्यक्तिगत लाभ के लिए इसे साधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। मामले को 28 जनवरी को सुनवाई के लिए रखा गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस अधीक्षक और एसएचओ अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए उपस्थित रहेंगे। उनके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जा सकती। किडनैप के मामले में शैलेन्द्रसिंह नहीं था शामिल एफआईआर में बताया कि काले रंग की स्कॉर्पियो के पीछे पुलिस की टीमें लग गई। हिस्ट्रीशीटर शैलेन्द्र अपनी एसयूवी को महाबार चौराहा, चौहटन चौराहे होते हुए भगा रहा था। इसी दौरान पुलिस के वाहन को देखकर धांधूपुरा के पास एसयूवी छोड़कर फरार हो गया। वहां खड़े लोगों से पता किया तो पता चला कि वाहन में 2 व्यक्ति थे, जो पैदल खेतों की तरफ भाग गए। इसके बाद तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो से गाड़ी के कागजात और पहचान के दस्तावेज मिले। याचिकाकर्ता के वकील धीरेंद्रसिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि किडनैपिंग की वारदात से इस गाड़ी के मालिक शैलेन्द्र सिंह का कोई लेना देना नहीं था। इसके बाद शैलेंद्र ने इस एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता के वकील धीरेंद्र सिंह ने बताया कि जोधपुर हाईकोर्ट के न्यायाधीश फरजंद अली ने पेश किए गए वीडियो फुटेज और तस्वीरों की जांच के बाद पाया कि वाहनों के बीच कोई टक्कर नहीं हुई थी। यह मामला झूठे सबूत गढ़ने का प्रतित होता है। हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा और कोतवाली एसएचओ लेखराज सियाग को शपथ पत्र के माध्यम से स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *