हाईकोर्ट ने पूर्व CEO की FIR रद्द करने से इनकार-किया:30 लाख गबन मामला, फर्जी वर्क ऑर्डर जारी कर आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर जनपद पंचायत की पूर्व मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने संबंधी याचिका खारिज कर दी है। यह मामला 30 लाख रुपए से अधिक के शासकीय धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। वाड्रफनगर-बसंतपुर पुलिस ने पूर्व सीईओ पर फर्जी वर्क ऑर्डर जारी कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया था। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 420, 409 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7(1)(a) और 13 के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस इस मामले में न्यायालय में चालान भी पेश कर चुकी है। याचिकाकर्ता ज्योति बबली कुजूर उस समय बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ थीं। कलेक्टर की ओर से किए गए कार्य विभाजन के तहत उन्हें वाड्रफनगर जनपद पंचायत में सीईओ के रूप में पदस्थ किया गया था। व्यक्तिगत दुश्मनी का लगाया आरोप याचिका में तर्क दिया गया कि वाड्रफनगर के तत्कालीन एसडीओपी से व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज किया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि विभागीय जांच पूरी हो चुकी है, इसलिए आपराधिक कार्यवाही को रद्द किया जाना चाहिए। कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा और न्यायमूर्ति की द्वैधपीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ वेद प्रकाश पांडेय की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका में उठाए गए तर्क साक्ष्यों से जुड़े हैं, जिनकी जांच और फैसला ट्रायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। ट्रायल कोर्ट में होगा मामले का फैसला हाईकोर्ट ने कहा कि इस चरण पर एफआईआर रद्द करने का कोई आधार नहीं है। मामले का अंतिम फैसला ट्रायल कोर्ट साक्ष्यों के आधार पर करेगा। इसी कारण हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। 2020 में दर्ज हुआ था मामला पूर्व सीईओ के खिलाफ 30 अप्रैल 2020 को बसंतपुर पुलिस ने अपराध दर्ज किया था। विभागीय जांच पूरी होने के बाद सामान्य प्रशासन, विधि और विधायी कार्य विभाग से अभियोजन की अनुमति मिली। इसके बाद पुलिस ने मामले में न्यायालय में चालान पेश किया।

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