हाईकोर्ट ने बीमित व्यक्ति की विधवा का क्लेम खारिज करने के मामले में कोटक महिन्द्रा बीमा कम्पनी को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। जस्टिस समीर जैन की अदालत ने यह आदेश विद्या शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कहा गया था कि बीमा कंपनी ने उनके पति कमलेश कुमार शर्मा की मौत के बाद क्लेम खारिज कर दिया। याचिका में कहा कि पति की 10 लाख रुपए के जीवन बीमा की रकम को मृत्यु का कारण प्राकृतिक और दुर्घटना न होकर आत्महत्या बताया गया। इस पर पत्नी ने स्थायी लोक अदालत में मामले को चुनौती दी थी। लेकिन स्थायी लोक अदालत ने भी मौत को संदेहास्पद मानते हुए आवेदन खारिज कर दिया। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने लड़ा फ्री ऑफ कोस्ट केस
अधिवक्ता हितेष बागड़ी ने बताया कि याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में आवेदन किया। रालसा ने फ्री ऑफ कोस्ट विधवा की याचिका हाईकोर्ट में दायर की। इस पर सुनवाई करते हुए हमने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के पति की मौत फूड पॉइजनिंग से 24 दिसम्बर 2017 को एसएमएस अस्पताल में हुई थी। मौत से पहले उनका सात दिन अस्पताल में इलाज चला था। जबकि बीमा कंपनी का कहना है कि उन्होंने जहरीला पदार्थ पीकर आत्महत्या की है। हमने कोर्ट को बताया कि यह जहरीला पदार्थ पीने से तुरंत मौत हो जाती है। जबकि याचिकाकर्ता के पति का इलाज 7 दिन चला था। हमारे तर्कों के बाद अदालत ने बीमा कंपनी को नोटिस जारी करके तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।


