झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स स्थित डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल के पद पर नियुक्ति के लिए जारी किए गए विज्ञापन को रद्द कर दिया है। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने विज्ञापन की पात्रता शर्तों को रिम्स नियमावली 2014 के अनुकूल नहीं माना। अदालत ने इसे कानूनी रूप से अवैध ठहराते हुए नियुक्ति प्रक्रिया रद्द कर दी। अदालत ने कहा है कि विज्ञापन में निर्धारित योग्यता पोस्ट ग्रेजुएशन (एमडीएस) के बाद 25 वर्ष का अनुभव रिम्स नियमों के विपरीत है। नियमावली में 2014 में केवल 25 वर्ष के व्यावसायिक अनुभव की आवश्यकता बताई गई है, न कि पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद का अनुभव। इस कारण विज्ञापन में अतिरिक्त शर्त लगाना नियमों के खिलाफ है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी प्रशासनिक विज्ञापन द्वारा वैधानिक नियमों में संशोधन या नया शब्द जोड़ना अनुचित है। अगर नियम और विज्ञापन के बीच संघर्ष हो, तो नियम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अदालत ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दी गई दलील को भी मानने से इंकार कर दिया। अदालत में भूमि सुधार उप समाहर्ता के शपथपत्र से यह तथ्य सामने आया कि सीआईपी के वास्तविक कब्जे में मात्र 229.29 एकड़ भूमि ही पाई गई, जबकि संस्थान के अनुसार उसकी कुल भूमि 376.222 एकड़ है। इस प्रकार लगभग 147 एकड़ भूमि का कोई स्पष्ट विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर अतिक्रमण की आशंका प्रबल हो गई है। अदालत ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि शपथपत्र में केवल सीआईपी के मुख्य गेट के पास अतिक्रमण हटाने का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य अतिक्रमण की स्थिति के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई। निरीक्षण के समय सीआईपी के प्रतिनिधि की मौजूदगी के बावजूद कथित अतिक्रमण के सटीक स्थानों को चिह्नित नहीं किया जा सका। यह रवैया अदालत के आदेशों के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।


