हिमाचल हाईकोर्ट से शिमला के SP संजीव गांधी को आज आंशिक राहत मिली है। चीफ जस्टिस गुरमीत सिंह संधावालिया और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि एसपी और SIT के अन्य सदस्यों की व्यक्तिगत व पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुंचे, इसलिए याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकार किया जाता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की इस दलील को स्वीकार करते हुए माना कि उन्हें अपनी बात रखने और जांच रिपोर्ट की पूरी व्याख्या करने का पूरा मौका नहीं मिला। वहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत केस की जांच CBI को सौंपने के आदेशों के मामले में दखल नहीं देंगे। यानी इस केस की जांच आगे भी सीबीआई ही करती रहेगी। कोर्ट ने सरकार और उन सभी लोगों को नोटिस जारी किए, जिन्हें शिमला एसपी ने एलपीए में पार्टी बनाया है। याचिकाकर्ता के एडवोकेट संजीव भूषण ने कहा, सिंगल बैंच की जजमेंट में कुछ कमेंट एसपी और शिमला पुलिस के खिलाफ आ गए थे। उन्हें एलपीए में चैलेंज किया गया। उन्होंने कहा, डीजीपी ने बिना बताए ऐसी रिपोर्ट दे दी, जो मेलाफाइड थी। कोर्ट ने भी इस पर भरोसा कर दिया। कोर्ट के आज के फैसले से वह खुश हैं। उन्होंने बताया कि अब इस केस में अगली सुनवाई 14 जुलाई को होनी है। संजीव गांधी ने दायर की थी एलपीए बता दें कि एसपी संजीव गांधी ने बीते सोमवार को कोर्ट में एलपीए दायर की थी। इसमें संजीव गांधी की ओर से मांग की गई है कि विमल नेगी की मौत मामले की पूरी जांच हाईकोर्ट की देखरेख में की जाए। संजीव गांधी ने सरकार समेत पावर कॉरपोरेशन, सीबीआई, विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी, डीजीपी और गृह मंत्रालय को भी पार्टी बनाया है। हरिकेष मीणा को 16 जून तक अग्रिम जमानत हाईकोर्ट में आज IAS अधिकारी हरिकेष मीणा की अरेस्ट प्रोटेक्शन याचिका पर भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को एप्लिकेशन फाइल करने के लिए कहा था। मामले में अब राज्य सरकार पार्टी थी। मगर अब सीबीआई पार्टी बन गई है, क्योंकि हाईकोर्ट ने विमल नेगी मौत मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया है। IAS हरिकेष मीणा पर परिजनों ने प्रताड़ना के आरोप लगा रखे हैं। जब विमल नेगी की मौत हुई, उस दौरान हरिकेष मीणा पावर कॉरपोरेशन में एमडी थे। हरिकेष मीणा ने गिरफ्तारी से बचने को हाईकोर्ट से 16 जून अग्रिम जमानत ले रखी है।


