हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल एफआईआर दर्ज होना किसी भी कर्मचारी की पदोन्नति रोकने का आधार नहीं हो सकता। चंडीगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी) ने कहा कि एफआईआर दर्ज होना लंबित आपराधिक कार्यवाही (पेंडिंग क्रिमिनल प्रॉसिडिंग) नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट भी अपने पूर्व के फैसले यूनियन ऑफ इंडिया वर्सेज के.वी. जानकी रमण में साफ कर चुका है कि कोई मामला लंबित तभी माना जाएगा जब चार्जशीट दाखिल हो और अदालत संज्ञान ले। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जनवरी 2024 की एक चिट्ठी में खुद अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि न तो आरोप तय हुए हैं और न ही अदालत ने संज्ञान लिया है। ऐसे में जसप्रीत सिंह की पदोन्नति रोकना उचित नहीं था। हाईकोर्ट का फैसला
चंडीगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी) ने सुनवाई में साफ कहा कि केवल FIR दर्ज होने से किसी कर्मचारी की पदोन्नति (Promotion) नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज होना लंबित आपराधिक कार्यवाही (पेंडिंग क्रिमिनल प्रॉसिडिंग) नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट भी अपने पहले के फैसले (यूनियन ऑफ इंडिया वर्सेज के.वी. जानकी रमण) में ये साफ कर चुका है कि कोई मामला लंबित तभी माना जाएगा जब चार्जशीट दाखिल हो और अदालत संज्ञान ले। हाईकोर्ट ने यह भी बताया कि जनवरी 2024 की एक चिट्ठी में खुद अधिकारियों ने माना था कि न तो आरोप तय हुए हैं और न ही अदालत ने संज्ञान लिया है। ट्रिब्यूनल का आदेश खारिज
हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का आदेश खारिज करते हुए सेना को निर्देश दिया कि जसप्रीत सिंह को 25 मई 2022 के प्रमोशन आदेश के मुताबिक JCO पद पर पदोन्नत माना जाए और सभी वेतन व सेवा से जुड़े लाभ दिए जाएं। आदेश का पालन 8 हफ्तों में करने को कहा गया है। सेना से जुड़ा मामला जसप्रीत सिंह भारतीय सेना (Indian Army) में जवान के तौर पर सेवामुक्त था और उसे जूनियर कमीशंड ऑफिसर (JCO) पद पर प्रमोशन किया जाना था। यानी मामला सेना विभाग से जुड़ा था और उसी के खिलाफ उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


