हाईकोर्ट: हाईवे किनारे से हटाओ अवैध धर्मकांटे व निर्माण:बस-ट्रेलर भिड़ंत में 4 की मौतों पर कोर्ट सख्त, कहा- 6 फरवरी तक खुद हटा लो, वरना…

जोधपुर में रिंग रोड और हाईवे पर अवैध रूप से चल रहे धर्मकांटों (रॉयल्टी नाकों) के कारण हुए हाल ही में बस-ट्रेलर हादसे में 4 लोगों की मौत को राजस्थान हाई कोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि हाईवे के केंद्र बिंदु से 75 मीटर के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माण 6 फरवरी तक हटा लिए जाएं। याचिकाकर्ता हिम्मतसिंह गहलोत की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित पक्ष ने 6 फरवरी तक अवैध निर्माण नहीं हटाया, तो प्रशासन 9 फरवरी तक उसे ध्वस्त करके इसकी रिपोर्ट पेश करे। कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- 4 जानें गईं, हम मूकदर्शक नहीं रह सकते “आम तौर पर हम इस स्तर पर ऐसे मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए, जिसमें दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई है, यह कोर्ट मूकदर्शक नहीं बना रह सकता।” वकील ने दी अंडरटेकिंग: हम खुद हटा लेंगे मामले में एक नया मोड़ तब आया जब प्रतिवादी पक्ष (मैसर्स रिद्धि सिद्धि व अन्य) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य ने कोर्ट में अंडरटेकिंग दी। एडवोकेट आचार्य ने तर्क दिया कि अगर कोई निर्माण हाईवे के नियमों (मध्य बिंदु से 75 मीटर के भीतर) का उल्लंघन कर रहा है, तो उनकी पार्टी 6 फरवरी तक उसे “स्वतः संज्ञान” लेते हुए खुद हटा लेगी। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया कि 6 फरवरी तक ऐसा नहीं होने पर, जिम्मेदार अधिकारी 9 फरवरी तक कार्रवाई सुनिश्चित करें। पुराना आदेश संशोधित, स्टे का लाभ नहीं मिलेगा गौरतलब है कि इससे पहले 20 जनवरी को एकल पीठ ने एक अन्य याचिका (मैसर्स रिद्धि सिद्धि हाउसिंग प्रा. लि. बनाम जेडीए) में ‘दंडात्मक कार्रवाई’ पर रोक लगा दी थी। खंडपीठ ने इस आदेश को संशोधित करते हुए स्पष्ट किया कि, “लागू मानदंडों का पालन किए बिना किया गया कोई भी निर्माण गैरकानूनी है।” कोर्ट ने कहा कि पुराने आदेश की आड़ में इंसानी जान लेने वाले हादसों की वजह बनने वाले निर्माणों को नहीं बचाया जा सकता। अधिकारियों की रिपोर्ट में खुलासा: अवैध था नाका कोर्ट के सामने सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), जेडीए और नेशनल हाईवे अथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के पत्र भी रखे गए, जिनसे अवैध गतिविधियों की पुष्टि हुई: पूरे राजस्थान में जांच के आदेश कोर्ट ने मामले का दायरा बढ़ाते हुए एनएचएआई और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वे पूरे राजस्थान में नेशनल हाईवे के आसपास हो रहे अवैध निर्माणों (दूरी के नियमों का उल्लंघन) पर एक स्वतंत्र रिपोर्ट और शपथ पत्र पेश करें। कोर्ट ने पूछा है कि वे यह सुनिश्चित कैसे करेंगे कि भविष्य में ऐसे अवैध निर्माणों से हादसे न हों। मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी 2026 को होगी।

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