जिले में नेशनल हाईवे-21 पर ऊंचा नगला तिराहे से सारस चौराहे होते हुए शीशम तिराहे तक फ्लाइओवर्स के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। परियोजना के लिए 201 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं इसके दोनों लंबी सर्विस लाइन के लिए अलग से 118 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। निर्माण कार्य के लिए टेंडर नोटिस भी जारी कर दिया गया है। फ्लाईओवर पिलरों पर आधारित होगा और इसे छह लेन में तैयार किया जाएगा। एक ओर तीन लेन तथा दूसरी ओर तीन लेन की होगी। दोनों तरफ सात–सात मीटर चौड़ी सर्विस लाइन बनाई जाएगी। इसके साथ ही फ्लाइओवर अंडर पास पिलर पर होने के कारण लोग नीचे भी आवागमन कर सकेंगे। वर्षों से सारस चौराहा दुर्घटनाओं और जाम की वजह से हॉट स्पॉट घोषित था। यहां फ्लाइओवर निर्माण की मांग लगातार उठती रही। फ्लाईओवर बनने के बाद ऊंचा नगला तिराहा, सारस चौराहा और शीशम तिराहे पर हादसों और यातायात जाम की समस्या से लोगों को राहत मिल सकेगी। इन तीनों जगहों पर वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद 2 साल के भीतर निर्माण कार्य को पूरा कराना होगा। ऊंचा नगला पर 1.330 किमी और सारस चौराहा से होते हुए घना बर्ड सेंचुरी, पॉलिटेक्निक कॉलेज, मेडिकल कॉलेज से सेवर चौराहे होते हुए आगे 9 किमी क्षेत्र तक फ्लाइओवर्स का निर्माण किया जाएगा। पांच हजार पेड कटेंगे, 50 हजार लगाने होंगे वन विभाग के सर्वे के अनुसार, 50 हजार नए पेड़ लगाने और उन्हें विकसित करने के लिए लगभग 50 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। शर्त यह है कि यह भूमि टीटीजेड (ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन) की निर्धारित भौगोलिक सीमा के भीतर ही उपलब्ध कराई जाए। फ्लाईओवर और वाहन अंडरपास निर्माण के दौरान करीब 5 हजार पेड़ काटने पड़ेंगे। दुर्घटनाओं के कारण ब्लैक स्पॉट घोषित बांसी, डहरा मोड़, लुलहारा और सेवर पर अब राहत की राह खुल गई है। इन स्थानों पर 154 करोड़ रुपये की लागत से व्हीकल अंडरपास (VUP) बनाया जाएगा। इसके लिए 26 दिसंबर को निविदा जारी की है। वर्क ऑर्डर जारी होने के बाद निर्माण कार्य को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। निर्माण कार्य करने वाली फर्म को अगले 10 साल तक अंडरपास का रखरखाव भी करना होगा। बांसी कलां पर 1.320 किमी, लुलहारा पर 1.320 किमी और डहरा मोड़ पर 1.30 किमी तक व्हीकल अंडरपास बनाया जाएगा। भास्कर इनसाइट -18 साल में 167 हादसे, 68 मौतें एनएच-21 पर सारस चौराहे के आसपास घना गेट से उदयविलास होटल तक के 1.5 किलोमीटर क्षेत्र में बीते 18 वर्षों में हादसों का सिलसिला थमा नहीं। इस दौरान कुल 167 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 68 लोगों की मौत हो गई और 140 लोग घायल हुए। अगर इस साल के आकड़े जोड़ दिया जाए तो हादसे और मौत का आकड़ा और बढ़ जाएगा। को लगातार बढ़ते हादसों के कारण यह क्षेत्र ब्लैक स्पॉट घोषित किया गया है। लेकिन अब लोगों को राहत मिलने जा रही है।


