हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा है कि प्रदेश के अस्पतालों में डॉक्टरों के खाली पद, रीएजेंट की कमी, रात में इलाज की सुविधा नहीं होना चिंताजनक है। हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव को बेहतर सुविधाओं के लिए कदम उठाने और 17 सितंबर से पहले विस्तृत शपथपत्र देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) को जरूरी किट की सप्लाई सुनिश्चित करने और इस पर स्टेटस रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बिलासपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बिल्हा और रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर शपथ पत्र दिया है। दरअसल, हाई कोर्ट ने बिल्हा सीएचसी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और एक्स-रे मशीन के बंद होने और रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में पंजीकरण और इलाज में देरी को लेकर छपी खबरों पर संज्ञान लेते हुए जवाब मांगा था। राज्य सरकार ने बताया कि बिल्हा सीएचसी में 9 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 3 कार्यरत हैं, जबकि 6 पद खाली हैं। इसके अलावा, 3 स्नातकोत्तर चिकित्सा अधिकारी के पद भी खाली हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 1 चिकित्सा अधिकारी और 1 डेंटिस्ट कार्यरत हैं। वहीं, बताया कि एक्सरे मशीन काम कर रही है। जुलाई 2025 में ही 426 एक्सरे किए गए। मशीन की तस्वीर और मार्च से जुलाई तक के एक्सरे के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए। जुलाई में 3644 की ओपीडी, 84 बच्चों का जन्म यह भी बताया कि जुलाई 2025 में बिल्हा सीएचसी की ओपीडी में में 3644 मरीज आए। , 630 प्रसवपूर्व देखभाल पंजीकरण हुआ और 84 प्रसव कराए गए। अस्पताल में 50 बिस्तर, साफ- सुथरा वार्ड और ऑपरेशन कक्ष मौजूद हैं, लेकिन एनेस्थेटिस्ट की कमी के कारण रात में आपातकालीन सर्जरी संभव नहीं है।


