हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने फैमिली कोर्ट से कहा है कि वह हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अल्पसंख्यक वर्ग के पाइंट पर लंबित किसी परिवाद पर निर्णय पारित नहीं करेगी। हाई कोर्ट इस विषय पर विस्तार से आदेश पारित करेगी। इसके लिए हाई कोर्ट ने न्यायमित्र भी नियुक्त कर दिया है। कोर्ट को बताया गया कि फैमिली कोर्ट के द्वारा हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अल्पसंख्यक वर्ग की एक नहीं बल्कि 28 अर्जी एक ही दिन में खारिज कर दी थी। प्रशासनिक जज विवेक रूसिया, जस्टिस गजेंद्र सिंह की खंडपीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पंकज खंडेलवाल ने पैरवी की। अपील में उल्लेख किया कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत जैन समुदाय के पक्षकारों ने आपसी सहमति से अलग होने के लिए फैमिली कोर्ट में परिवाद दायर किया था, लेकिन कोर्ट ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी था कि केंद्र सरकार ने 27 जनवरी 2014 को जैन समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा दे दिया था। इस वजह से हिंदू मैरिज एक्ट के तहत इस समुदाय की सुनवाई नहीं की जा सकती।


