हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने नर्मदा जल की आपूर्ति के लिए अमृत-2 परियोजना की मंजूरी को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि अमृत-1 का अधूरा क्रियान्वयन या राजकोष पर संभावित वित्तीय बोझ राज्य को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नई योजना बनाने से रोकने का औचित्य नहीं दे सकता। अदालत ने यह भी कहा कि पिछली योजना 14 साल पहले लागू की गई थी और इसलिए शहर में जलापूर्ति की कमी की समस्या के समाधान के लिए एक नई योजना तैयार करना आवश्यक था। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल इसलिए कि पहले की योजना पूरी तरह से लागू नहीं हुई है, राज्य सरकार और नगर निगम को भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर योजनाएं बनाने से रोकने का कोई आधार नहीं है। विशेषज्ञों ने पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए एक योजना बनाने की आवश्यकता महसूस की है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी थी कि 2011 में अमृत 1.0 योजना तैयार की गई थी, लेकिन उसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था। इसके बावजूद, अमृत 2.0 योजना शुरू की गई है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। जनसंख्या कई गुना बढ़ गई
अदालत ने कहा 2050 तक जनसंख्या 82 लाख से ज्यादा हो सकती है, जिसके लिए पर्याप्त मात्रा में पेयजल और जलापूर्ति की आवश्यकता होगी। योजना में कहा गया है कि वर्तमान जल आपूर्ति 323 एमएलडी है, जबकि 97.69 एमएलडी की कमी है, जिसे बढ़ाकर 1650 एमएलडी करने का प्रस्ताव है। 32 नई टंकियां बनाएंगे, 400 एमएलडी ज्यादा पानी लेंगे, दावा हर घर तक पहुंचेगी नर्मदा
चौथे चरण में 40 टंकियां बनाएंगे। 400 एमएलडी अतिरिक्त पानी लेंगे। निगम का दावा है कि हर घर नर्मदा पहुंचेगी। नर्मदा परियोजना के पहले, दूसरे और तीसरे चरण क्रमशः 1978, 1990 और 2010 में पूरे हुए। शहर में वर्तमान में 106 टंकियां हैं। नर्मदा के चौथे चरण के तहत 32 नई टंकियों का निर्माण किया जाएगा। नर्मदा किनारे नया इंटेकवेल, रॉ वाटर लाइन, 22 किमी लंबी पंपिंग मेन क्लियर वाटर लाइन, फीडर लाइन और ग्रेविटी मेन भी डाली जाएगी। नया ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया जाएगा। यह सारे काम अमृत-2 में होंगे। टंकियों से वितरण लाइन डालने का काम भी इसी चरण के तहत पूरा किया जाएगा। वर्तमान में निगम के पास 105 टंकियां है। इनमें से 27 अमृत योजना के पहले चरण में बनाई गई।


