5वीं अनुसूची में शामिल जिलों में ओबीसी आरक्षण खत्म करने पंचायत राज अधिनियम की धारा 129 (ड.) की उपधारा (3) को विलोपित करने के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने 3 दिसंबर को पंचायत राज संशोधन अधिनियम प्रस्तुत किया, लेकिन इसे विधानसभा में पारित नहीं कराया गया है। चूंकि विधानसभा का सत्र अनिश्चित काल के लिए समाप्त हो चुका है, ऐसे में अधिनियम को पारित नहीं माना जा सकता। इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि 27 जनवरी तक का समय है, ऐसे में याचिका प्री-मैच्योर है। अब 27 जनवरी को सुनवाई होगी। सूरजपुर जिला पंचायत के उपाध्यक्ष नरेश राजवाड़े ने याचिका दायर कर बताया है कि 5वीं अनुसूची में शामिल जिलों में ओबीसी को आरक्षण देने वाले छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 129 (ड.) की उपधारा (03) को विलोपित करने के लिए राज्य सरकार ने 3 दिसंबर 2024 को पंचायत राज (संशोधन) अध्यादेश-2024 प्रस्तुत किया। संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत कोई भी अध्यादेश अधिकतम 6 माह की अवधि तक ही प्रभावशील होता है। इसे विधानसभा में अनिवार्य रूप से प्रस्ताव पारित कर अधिनियम का रूप दिलाना होता है, लेकिन इस प्रस्ताव में ऐसा नहीं किया गया। अध्यादेश जारी होने के बाद 16 से 20 जनवरी 2024 तक हुए विधान सभा सत्र में इस महत्वपूर्ण अध्यादेश को पारित नहीं कराते हुए सिर्फ पटल पर रखा गया। इस कारण यह अध्यादेश वर्तमान में विधिशून्य/औचित्यविहीन हो गया है। ऐसी स्थिति में वर्तमान में उक्त संशोधन के आधार पर छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम (5) में 24 दिसंबर 2024 को किया गया संशोधन पूरी अवैधानिक हो गया है। चुनाव के लिए जारी रोस्टर अवैधानिक, निरस्त करें कहा गया कि इस प्रकार अवैधानिक हो चुके संशोधित छत्तीसगढ़ पंचायत निर्वाचन नियम (5) के आधार पर प्रदेश के संचालक, पंचायत एवं सभी जिलों में कलेक्टर द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के लिए जारी किया गया आरक्षण रोस्टर भी पूरी अवैधानिक हो गया है। इसे निरस्त कर पूर्व प्रावधान के आधार पर आरक्षण रोस्टर तय कर वैधानिक रूप से पंचायत चुनाव कराएं।


