हाई कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में महिला टॉयलेट साफ करने से इनकार करने वाली महिला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खिलाफ सख्त एक्शन लेने पर रोक लगा दी है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह अंतरिम आदेश कौशल्या देवी की याचिका पर दिए। कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण रजिस्ट्रार से 12 मार्च तक जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया था कि अधिकरण के आदेश व निर्देश गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार के विपरीत हैं। टॉयलेट साफ करने से इनकार करने पर उसे जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। टॉयलेट साफ करने से मना करने पर थमा दी चार्जशीट याचिकाकर्ता के वकील सुनील समदड़िया ने बताया कि महिला को पति की मृत्यु होने पर 2013 में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर कैट में काम कर रही थी। याचिकाकर्ता को मौखिक तौर पर अधिकरण के मुखिया और ज्युडिश्यल मेंबर के घर पर काम करने को कहा गया था। उसने इसके लिए लिखित में आदेश देने को कहा तो लिखित में आदेश नहीं दिए गए। इसके बाद उसे अधिकरण में दो सफाई कर्मचारियों के कार्यरत होने के बावजूद महिला टॉयलेट साफ करने के निर्देश दिए गए। याचिकाकर्ता ने इसके खिलाफ प्रतिवेदन दिया और कहा कि महिला टॉयलेट साफ करना उसकी ड्यूटी का हिस्सा नहीं है। दस साल की नौकरी के दौरान उससे कभी टॉयलेट साफ करने को नहीं कहा गया। लेकिन उसका प्रतिवेदन खारिज कर दिया गया और कुछ दिन बाद उसे ज्युडिश्यल सेक्शन से फाइलें लाने-ले जाने के काम से हटाकर टॉयलेट सफाई करने के आदेश दिए। याचिकाकर्ता ने फिर से एक प्रतिवेदन दिया जो कि खारिज कर दिया। इसके बाद रजिस्ट्रार ने अधिकरण की मुखिया और ज्युडिश्यल मेंबर की सहमति से याचिकाकर्ता के खिलाफ आदेश नहीं मानने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी और चार्जशीट थमा दी।


