एमपी में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट को लेकर आरटीओ के कर्मचारी ही आम लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वे न केवल वेंडर्स का पता दे रहे हैं बल्कि ये भी कह रहे हैं कि प्लेट बनकर आएगी तो परिवहन विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन अपडेट कर देंगे। हकीकत ये है कि एमपी में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सियाम( siam.in) पर ही रजिस्ट्रेशन कर बनवाई जा सकती है। परिवहन विभाग ने किसी भी प्राइवेट वेंडर को ऑथराइज्ड नहीं किया है। अब इस मामले के दो और पहलू हैं। पहला ये कि मार्केट में नकली हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट भी धड़ल्ले से बनाई जा रही है। जो केवल दिखती असली HSRP जैसी है, मगर उसमें वो सिक्योरिटी फीचर्स नहीं होते, जो होना चाहिए। इनके खिलाफ परिवहन विभाग किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर रहा है, न ही कोई एडवाइजरी जारी कर रहा है। दूसरा ये कि वो पुरानी गाड़ियां जिनके शोरूम अब बंद हो चुके हैं इन गाड़ियों में नंबर प्लेट कैसे लगेगी? इसका कोई सॉल्यूशन परिवहन विभाग के पास नहीं है, इसलिए आम लोग नकली HSRP लगाने को मजबूर है। ये पूरा सिस्टम कैसे चल रहा है? इसे समझने के लिए भास्कर ने एक हफ्ते तक पड़ताल की। नकली प्लेट बनाने वाले, दलाल और गुमराह करने वाले आरटीओ कर्मचारियों को खुफिया कैमरे में कैद किया तो परिवहन विभाग के अफसरों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… भास्कर ने क्यों किया इन्वेस्टिगेशन…? नंबर प्लेट बदलकर चोरी का डंपर बेचा
दरअसल, सरकार ने 1 अप्रैल 2019 से सभी नए वाहनों पर HSRP अनिवार्य कर दिया है। पुराने वाहनों के लिए भी इसे लगवाना जरूरी है। इसका मकसद है – नंबर प्लेट्स में एकरूपता लाना और अपराधों पर लगाम लगाना। बैतूल जिल के मुलताई में पिछले दिनों पुलिस ने एक डंपर पकड़ा, जिस पर मध्य प्रदेश की नंबर प्लेट (MP 48 ZD 2340) लगी थी। जांच में पता चला कि उसका असली नंबर उत्तर प्रदेश (UP 93 BT 0325) का था। चोरों ने चेसिस नंबर को घिसकर मिटा दिया था और फर्जी नंबर लिख दिया था। मकसद साफ था – चोरी के डंपर को बेचना। अब भास्कर इन्वेस्टिगेशन….. HSRP को लेकर भास्कर की टीम ने तीन स्तर पर जांच की। हमारी टीम अपनी कार लेकर एमपी नगर की उस गली में पहुंची, जो नंबर प्लेट बनाने के लिए जानी जाती है। गाड़ी रुकते ही एक युवक, हरीश, दुकान से निकलकर आया। रिपोर्टर: HSRP लगवानी है। हरीश: लग जाएगी, गाड़ी साइड में लगा दो। रिपोर्टर: ओरिजिनल लगेगी? कितना पैसा लगेगा? हरीश: ओरिजिनल के जैसी ही है, देखने से भी पता नहीं लगेगा। एक प्लेट का 450 रु. लगेगा। पूरी एल्युमिनियम की रहेगी। रिपोर्टर: पुलिस चालान तो नहीं करेगी? हरीश (विश्वास से): नहीं, कोई चालान नहीं बनेगा। अभी सब जगह यही चल रही है। ( पास में रखी एक और प्लेट दिखाते हुए)… ये भी अभी बनी है। फर्क बस इतना है कि इस पर लेजर वाला सीरियल नंबर नहीं होता, बाकी सब सेम टू सेम है। आप तो डिटेल वॉट्सएप कर दो, मैं हैंड टू हैंड बना दूंगा। आज बनवाते हो तो 400 रु. दे देना। हरीश ने बिना कोई डॉक्यूमेंट मांगे, महज 400 रुपए में हूबहू HSRP बनाने की हामी भर दी थी। अगले दिन हम दूसरी दुकान पर पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात प्रेम राजपूत से हुई। रिपोर्टर: हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनानी है, अर्जेंट में। प्रेम (एक प्लेट दिखाते हुए): यह HSRP की कॉपी है, ऐसी बन जाएगी। रिपोर्टर: ओरिजिनल नहीं मिलेगी? प्रेम: ओरिजिनल भी मिलेगी, लेकिन उसके 1400 रु. लगेंगे और एक हफ्ता इंतजार करना पड़ेगा। रिपोर्टर: कॉपी और ओरिजिनल में फर्क क्या है? प्रेम: कुछ भी फर्क नहीं, बस कॉपी वाली में लेजर नंबर नहीं होते। दोनों प्लेट के 500 रु. लगेंगे। आधे घंटे में रेडी हो जाएगी। रिपोर्टर: कोई डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं पड़ेगी? प्रेम (हंसते हुए): कोई डॉक्यूमेंट नहीं चाहिए। ओरिजिनल के लिए RTO में डॉक्यूमेंट देने पड़ते हैं। स्टिंग ऑपरेशन 3: 600 रुपए में रिपोर्टर की गाड़ी पर लग गई नकली HSRP
अब हमें सबूत चाहिए था। हम एंजेल ग्राफिक्स पर पहुंचे। यहां राहुल साहू से बात हुई। रिपोर्टर: गाड़ी की नंबर प्लेट लगवानी है।
राहुल: RTO टाइप की आएगी, लगा देते हैं। आधे घंटे में कवर के साथ लगा देंगे। 800 रु. लगेंगे… चलो आपके लिए 600 रु. कर देंगे। राहुल ने न गाड़ी की आरसी मांगी, न कोई और कागज। सिर्फ गाड़ी का नंबर पूछा और काम शुरू कर दिया। उसने रिपोर्टर के सामने ही प्लेट बनाई, उस पर फर्जी होलोग्राम चिपकाया और महज 20 मिनट में गाड़ी पर (MP 42 ME xxx7) नंबर प्लेट लगाकर 600 रुपए ले लिए। जब RTO कर्मचारी ने ही बताया जुगाड़ का रास्ता…
सड़क पर बैठे वेंडर तो नकली HSRP प्लेट लगा रहे हैं, लेकिन आरटीओ के कर्मचारी भी आम लोगों को गुमराह कर रहे हैं। भोपाल आरटीओ के काउंटर नंबर 2 पर रेनू महाजन बैठती हैं। भास्कर रिपोर्टर ने जब उनसे पूछा कि ये HSRP कैसे लगेगी, तो वह बोली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ेगा। मगर, उन्हें खुद ही पता नहीं था कि कौन से पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होता है। साथ ही उन्होंने बाहर किसी वेंडर से प्लेट बनाने की भी बात कह दी। ये भी कहा कि बाद में इसे ऑनलाइन करवा लेना। पढ़िए बातचीत.. रिपोर्टर : पुरानी फिएट गाड़ी है उसके नंबर प्लेट लगवानी है। रेनू महाजन : हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए आप ऑनलाइन आवेदन करिए। रिपोर्टर : मैं ऑनलाइन किया था लेकिन अभी तक आई नहीं है। बाहर भी लग जाएगी क्या? रेनू महाजन : लगाने को तो कोई भी लगा देगा। बाहर भी लग जाएगी। लेकिन ऑनलाइन अपडेट करवानी पड़ेगी। रिपोर्टर : अपडेट कैसे मैं समझा नहीं। रेनू महाजन: अपडेट का मतलब है नंबर प्लेट की रसीद कटेगी और ऑनलाइन इंटरनेट पर गाड़ी की डिटेल दिखेगी।… RTO के बाहर दलाल का खेल
RTO ऑफिस के बाहर हमारी मुलाकात सैयद फैजल अली से हुई, जो लकी यातायात एजेंसी चलाता है और कुछ देर पहले ही अधिकारी से मिलकर आया था। रिपोर्टर: फिएट गाड़ी की नंबर प्लेट लगवानी है। सैयद: बन जाएगी… करेंगे आपके लिए जुगाड़… आप क्यों टेंशन ले रहे हैं। हम आपको एक गुप्त जगह बताएंगे, आपको गाड़ी वहीं ले जानी पड़ेगी। जब प्लेट लग जाएगी, तो RTO से अपडेट कराने का काम हमारा है। 20-25 दिन में ऑनलाइन अपडेट हो जाएगा। दोनों गाड़ियों के 5 हजार रु. लगेंगे। ऑनलाइन फर्जीवाड़ा: BookMyHSRP के नाम पर लूट
यह घोटाला सिर्फ ऑफलाइन नहीं है। एमपी के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर विवेक शर्मा के मुताबकि BookMyHSRP.com पोर्टल पर भी रजिस्ट्रेशन किया जा सकता है। एमपी में परिवहन विभाग ने सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स( SIEM)के पोर्टल पर जाकर HSRP के लिए रजिस्ट्रेशन की डील की है। इस पोर्टल पर बुक HSRP का टैब है इसे क्लिक करने पर नाम, ईमेल, स्टेट, व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल और जिले की जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। कुछ पोर्टल HSRP के नाम पर ठगी का काम कर रहे है। भास्कर की पड़ताल में ये 5 पोर्टल फर्जी मिले हमने orderhsrp.com पर अपनी गाड़ी की नंबर प्लेट बुक की। वेबसाइट ने चेसिस और इंजन नंबर जैसी जानकारी तो ली, लेकिन अगले ही स्टेप में सीधे 1198 रुपए का पेमेंट QR कोड आ गया। हमने पेमेंट किया तो दीपक कुमार नाम के व्यक्तिगत खाते में पैसा गया। स्क्रीन पर मैसेज आया कि प्लेट 14-21 दिन में डिलीवर हो जाएगी। मगर, 21 दिन बाद भी न प्लेट आई, न वेबसाइट पर संपर्क करने का कोई जरिया है। बंद हो चुकी कंपनियों की गाड़ियों में HSRP लगना मुश्किल
भोपाल में फिएट, मित्सुबिशी, पंजाब ट्रैक्टर्स जैसी 9 कंपनियों के करीब 2000 वाहन मालिक परेशान हैं। ये कंपनियां भारत में कारोबार बंद कर चुकी हैं, इसलिए आधिकारिक पोर्टल पर इनकी HSRP बुक नहीं हो पा रही है। नियम के मुताबिक, वाहन निर्माता और प्लेट निर्माता के बीच एग्रीमेंट जरूरी है। इसी मजबूरी का फायदा नकली प्लेट बनाने वाले उठा रहे हैं। फर्जी प्लेट परिवहन पोर्टल पर अपडेट नहीं होगी- ट्रांसपोर्ट कमिश्नर
भास्कर से बातचीत में एमपी के ट्रांसपोर्ट कमिश्नर विवेक शर्मा ने कहा कि HSRP बहुत जरूरी है। 1 अप्रैल 2019 के बाद जो भी गाड़ी बेची जा रही है उसमें प्लेट लगाने की जिम्मेदारी गाड़ी बेचने वाले डीलर की है। इससे पहले की जो गाड़ियां हैं उस पर प्लेट लगाने के लिए SIAM पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। उनसे पूछा कि HSRP के नाम पर फर्जी प्लेट बनाने का धंधा चल रहा है तो उन्होंने कहा कि SIAM (https://www.siam.in/) पोर्टल मध्य प्रदेश का अधिकृत HSRP पोर्टल है। इस अधिकृत पोर्टल के द्वारा जो भी प्लेट लगेगी, वो एम परिवहन एप पर ऑनलाइन दिखेगी, अगर मार्केट में कोई फर्जी लगा रहा है, तो वो गाड़ी पर तो लग जाएगी, लेकिन उसका कोई रिकॉर्ड नहीं रहेगा। वह बताते हैं कि HSRP में लेजर कोड होते हैं वो सिर्फ अधिकृत वेंडर के पास ही होते हैं। यदि कोई पहले नंबर प्लेट लगाकर बाद में ऑनलाइन करवाने का दावा कर रहा है तो वो आपको बेवकूफ बना रहा है। फर्जी नंबर प्लेट लगाने पर साढ़े पांच हजार का चालान
मध्य प्रदेश के सीनियर एडवोकेट और मोटर वाहन एक्ट के जानकार दीपेश जोशी बताते हैं कि फर्जी नंबर प्लेट लगाने या नियम का पालन न करने वाले पर साढ़े पांच हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। वे कहते हैं कि पहले जो नंबर प्लेट थी उससे धोखाधड़ी हो रही थी, इसे रोकने के लिए ही हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने के निर्देश दिए हैं। वे कहते हैं कि इसके दो फायदे हैं। पहला- ये हर जगह या हर कोई नहीं लगा सकता और दूसरा इसे स्नैप लॉक के साथ लगाया जा सकता है। ये वो ही लगा सकता है जो अधिकृत है। स्नैप लॉक हटाने पर नंबर प्लेट टूट जाती है।


