हाथ बंधे तो हड़ताल पर उतरे इंजीनियर, अब होगी कार्रवाई:औचक निरीक्षण में सब कुछ सॉफ्टवेयर तय कर रहा, इसलिए विरोध​​​​​​​

लोक निर्माण विभाग के करीब एक हजार इंजीनियर और सरकार आमने-सामने हैं। वजह साफ है। सरकार ने औचक निरीक्षण की व्यवस्था लागू की है। पूरा सिस्टम सॉफ्टवेयर से चल रहा है। इंजीनियरों के हाथ बंधे हैं। इसी विरोध में सोमवार को इंजीनियरों ने औचक निरीक्षण से दूरी बना ली। जो इंजीनियर निरीक्षण करने पहुंचे, उनका भी खुला विरोध हुआ। मामला टकराव तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद विभाग भी सख्त हो गया है। लोक निर्माण से जुड़ी अलग-अलग विंग के तीनों इंजीनियर इन चीफ ने मोर्चा संभाल लिया है। सभी चीफ इंजीनियरों से कहा गया है कि काम न करने वाले और विरोध करने वाले इंजीनियरों का पूरा डेटा तैयार किया जाए। फोटो और नाम के साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा कर ईएनसी को रिपोर्ट भेजी जाए। यह भी जांच होगी कि कौन इंजीनियर लंबे समय से अनुपस्थित है और काम नहीं कर रहा है। विरोध की वजह… शुरू हुई औचक निरीक्षण व्यवस्था, इसमें सब कुछ सॉफ्टवेयर की मदद से निर्माण में गुणवत्ता लाने के लिए पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने फरवरी में औचक निरीक्षण की व्यवस्था शुरू की। इसमें एक सॉफ्टवेयर की मदद से जगह का चयन होता है। वह भी एक दिन पहले जगह बताता है। इसके बाद चीफ इंजीनियर के साथ दूसरे इंजीनियर फील्ड में मौका मुआयना करते हैं। जहां गुणवत्ता खराब मिलती है, वहां के इंजीनियर और ठेकेदार पर कार्रवाई होती है। अच्छा काम करने वालों का प्रोत्साहन भी किया जाता है। इस बार भी सॉफ्टवेयर के जरिए सात जिलों का चयन किया गया। इनमें मुरैना, छतरपुर, रायसेन, बुरहानपुर, सिवनी और शहडोल शामिल हैं। लेकिन, जब इन जगह पर चीफ इंजीनियर पहुंचे तो लोक निर्माण, लोक निर्माण भवन, एमपीआरडीसी, बिल्डिंग डेवलपमेंट कार्पोरेशन, एनएचएआई के इंजीनियरों ने विरोध कर दिया। इंजीनियर बोले- कार्रवाई का विरोध कर रहे इधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इंजीनियरों की मांग उचित नहीं है। अब तक सिर्फ 7 इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई है, जबकि ठेकेदार 50 हैं। इंजीनियर एसोसिएशन के कपिल त्यागी ने कहा कि विरोध गुणवत्ता से नहीं, बल्कि कार्रवाई का है। फील्ड के आधे पद खाली हैं। हालांकि, विभाग में उनकी मांगों पर भी चर्चा चल रही है। सोमवार को विभाग की तरफ से ईएनसी लोक निर्माण भवन और ईएनसी ब्रिज एंड रोड को पत्र लिखकर कहा गया है कि इंजीनियरों ने जो समस्या बताई है, उसकी जानकारी जुटाकर प्रतिवेदन बनाकर विभाग को भेजें।

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