बीरगांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जचकी के कुछ घंटों बाद मंगलवार सुबह साक्षी निषाद की मौत हो गई। अस्पताल में ऑपरेशन के बाद साक्षी ने बेटी को जन्म दिया था। रात 11 बजे के बाद से उसे दर्द शुरू हुआ। आधी रात तक वह तड़पती रही। तड़के उसके पति दीपक और अन्य रिश्तेदार अंबेडकर अस्पताल लेकर गए। वहां जांच के बाद उसे मृत घोषित किया गया। बीरगांव अस्पताल में रात को एक भी डाक्टर नहीं थे। पुरुष नर्स ही उसका इलाज करता रहा। उसी ने साक्षी को रिफर किया। इस वजह से परिजनों को गुस्सा भड़क गया। वे साक्षी के शव को बिरगांव अस्पताल लेकर गए और वहां पुरुष नर्स अनुराग की जमकर पिटाई की। फिर परिजन खमतराई थाने गए और वहां अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने साक्षी का पोस्टमार्टम करवाया है। सीएमओ डा. मिथिलेश चौधरी ने इलाज में लापरवाही की जांच करने 5 डाक्टरों की टीम गठित की है। तीन दिन में टीम अपनी रिपोर्ट देगी। पति पीड़ा देख बुलाने गया तो स्टाफ ने कहा-नाटक कर रही अखिल शर्मा की रिपोर्ट 9 जून की सुबह करीब 10 बजे हम रावांभांठा अस्पताल गए। 2 बजे ऑपरेशन पूरा हुआ, पता चला बच्ची हुई है, हम सभी खुश थे। 2 घंटे बाद साक्षी को कमरे में लाया गया। रात 10 बजे तक वह ठीक थी। उसकी बुआ-फूफा सब उसे देखकर गए थे। रात 11 बजे के बाद उसे कमर में हल्का दर्द शुरू हुआ। धीरे-धीरे दर्द बढ़ने लगा। वह बार-बार यही कह रही थी कि दर्द हो रहा है। पानी प्यास लग रही है। 1 बजे जब उसने कहा कि ज्यादा ही प्यास लग रही है तो मैं वहां के स्टाफ के पास गया। उसे बताया कि साक्षी को खूब प्यास लग रही है। कमर में दर्द भी हो रहा है। मेल नर्स ने कहा अरे कुछ नहीं होता, उसे पानी पिला दो। मैने साथ चलने कहा। वह बहुत आनाकानी करने के बाद वह उठकर आया। थोड़ा पानी उसके सामने पिलाया। कुछ देर बाद वह फिर दर्द और प्यास की शिकायत करने लगी। मैं फिर बुलाने गया तो इस बार मेल नर्स ने भड़ककर कहा…कुछ नहीं हुआ है नाटक कर रही होगी। मैंने मिन्नतें की तो आकर दर्द का इंजेक्शन लगा दिया और चला। कुछ देर बाद मेरी साक्षी हमेशा के लिए खामोश हो गई। ये कहते हुए दीपक का दर्द छलक पड़ा वह बिलखने लगा। उसने पत्नी की मौत का घटनाक्रम बताया : रात करीब इंजेक्शन लगने के बाद साक्षी शांत सी हो गई थी। हमें लगा उसे राहत मिल रही है। मैंने उससे बात करने की कोशिश की। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। वह एकदम शांत थी तब मेरा ध्यान उसकी पेट की तरफ गया। सांस लेने से पेट भी हिलता है, लेकिन साक्षी की सांस ठीक से नहीं चल रही थी। मैं फिर से स्टाफ को बुलाने गया। वह भड़क गया, उसने मुझसे बदतमीजी करते हुए कहा कि वह फिर नाटक कर रही होगी। मेरे दबाव डालने पर वह चिल्लाते हुए आया कि तुम्हारा ट्रांसफर कर दूंगा। साक्षी के सामने आने के बाद भी वह कहने लगा कि नाटक कर रही होगी। उसने साक्षी के चेहरे पर पानी डाला। तब भी साक्षी कोई रिस्पॉन्स नहीं कर रही थी।


