सदर बाजार के गोपाल मंदिर और बूढ़ापारा के गिरिराज मंदिर में सोमवार को 31 दिवसीय हिंडोला उत्सव का समापन हुआ। आखिरी दिन परंपरानुसार ठाकुरजी ने सुरंग (लकड़ी) के 4 झूलों का आनंद लिया। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अब मंदिर में जन्माष्टमी की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त को है। राजधानी में प्रभु के जन्मोत्सव को लेकर अभी से ही खासा उत्साह दिखने लगा है। एक ओर जहां शहर के प्राचीन मठ-मंदिरों में साज-सजावट और भोग-प्रसाद बनने की तैयारी शुरू हो गई तो दूसरी ओर भगवान के जन्म की बधाइयां भी गूंजने लगीं हैं। पुरानी बस्ती के दूधाधारी और जैतूसाव मठ में अष्टमी से लेकर भगवान की छठी तक उत्सव जारी रहता है। इन 6 दिनों तक भगवान स्वर्ण शृंगार में दर्शन देते हैं, जो कि साल में सिर्फ 3 बार ही होता है। विशेष तौर पर भगवान राधाकृष्ण के भोग के लिए मालपुआ और धनिया की पंजीरी बनाई जाती है। मठ में इसकी तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। इधर, समता कॉलोनी के राधाकृष्ण मंदिर में झूला उत्सव की शुरुआत हुई है। वहीं चौबे कॉलोनी में जन्माष्टमी पर भजन संध्या की तैयारी की जा रही है। समता कॉलोनी के राधाकृष्ण मंदिर में शुरू हुआ झूला उत्सव समता कॉलोनी के राधाकृष्ण मंदिर में सोमवार से झूला उत्सव शुरू हुआ। मंदिर समिति के सत्येंद्र अग्रवाल ने बताया कि जन्माष्टमी तक विविध साज-सजावट के झूले में भगवान राधाकृष्ण को झूला झुलाया जाएगा। साथ ही हर दिन नए वस्त्र-आभूषण से शृंगार होगा। दूसरी ओर चौबे कॉलोनी के चिंताहरण मंदिर में जन्माष्टमी पर भजन संध्या का आयोजन होगा। श्रीहनुमान भक्त सेवा समिति के संजय अग्रवाल ने बताया कि गायक मनोज शर्मा रात 8 बजे से भजनों की प्रस्तुति देंगे। 56 भोग अर्पित कर महाआरती की जाएगी। हिंडोला दर्शन के लिए लगी कतार गिरिराज और गोपाल मंदिर में हिंडोला विजय उत्सव पर दर्शन करने लोगों की कतार लगी। शयन दर्शन में ठाकुरजी ने लकड़ी के हिंडोले में दर्शन दिए। दोनों ही मंदिरों में जन्माष्टमी की बड़ी बधाई गाई जा रही है। साथ ही कांसे की थाल और शहनाई की धुन में लोग कीर्तन कर रहे हैं। तीर्थों से भगवान के जन्मोत्सव के लिए सामग्रियां आने लगी हैं।


