हिंदू सम्मेलन में 5 हजार लोगों ने समरसता भोज किया:संत बोले- जनजातीय समाज सनातन संस्कृति का रक्षक, फूट डालने वाले होंगे नाकाम

धार जिले के टांडा क्षेत्र के ग्राम बिलदा में एक विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में आसपास के ग्रामीण इलाकों से हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं ने कई दिनों पहले से ही गांवों में वाहन रैलियां निकालकर लोगों को आमंत्रित किया था। मुख्य वक्ता और राष्ट्रसंत गोपालकृष्ण शर्मा (उज्जैन) ने अपने संबोधन में जनजातीय समाज को लालच देकर कराए जा रहे धर्मांतरण पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज सनातन संस्कृति की असली पहचान है और इसे सहेजने की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदू समाज में फूट डालने की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी और समाज एकजुट होकर ऐसी ताकतों का जवाब देगा। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल के सेवा कार्यों की भी सराहना की। महिलाओं की भूमिका और समाज सुधार पर जोर महिला वक्ता कविता राठौड़ ने परिवार और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की अहमियत बताई। उन्होंने कहा कि एक संस्कारित परिवार से ही अच्छे समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने संघ के पांच मुख्य मंत्रों-परिवार में संस्कार (कुटुंब प्रबोधन), पर्यावरण बचाओ, सामाजिक भाईचारा (समरसता), अपनी पहचान का गर्व (स्व का बोध) और अनुशासन को जीवन में उतारने की बात कही। हिंदुत्व से ही विश्व का कल्याण वक्ता गोविंद भयडिया ने कहा कि हिंदुत्व केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में शांति ला सकता है, क्योंकि इसमें ‘जगत कल्याण’ की भावना छिपी है। सम्मेलन के अंत में एक विशाल समरसता भोज का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 5 हजार लोगों ने एक साथ बैठकर भोजन किया और भाईचारे का संदेश दिया।

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