सादिया को बाहर निकाल लिया था। हिजाब लेने के लिए वह लौटी और जलता हुआ गेट उसपर गिर गया। घर की महिलाओं को दरवाजा तोड़कर निकाला तब ज्यादातर बेहोश थीं। थोड़ी और देर हो जाती तो कुछ भी हो सकता था। ये आंखों देखी बताई उन लोगों ने जोधपुर में सिलेंडर ब्लास्ट के दौरान मौके पर मौजूद थे। जोधपुर में सोमवार शाम गैस सिलेंडर में ब्लास्ट होने से 14 महीने के बच्चे समेत 2 की मौत हो गई और 14 लोग झुलस गए। हादसा भीतरी शहर के गुलाब सागर क्षेत्र के पास मियां की मस्जिद इलाके में रहने वाले मोहम्मद सत्तार चौहान के घर में हुआ। सोमवार शाम 4:30 बजे खाना बनाते समय गैस लीक के कारण आग लग गई थी। 24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन अब भी तीन मंजिला इमारत से रह-रह कर धुआं उठ रहा है। दीवारें काली हो गई हैं। घर के आसपास किसी को नहीं जाने दिया जा रहा है। हादसे की भयावहता और कारण जानने के लिए भास्कर टीम मौके पर पहुंची। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सिलेंडर ब्लास्ट के बाद लोग इतने दहशत में आ गए कि रातभर नींद ही नहीं आई। वहीं पड़ोसी परिवार अगले घर में शिफ्ट हो गए। पड़ोस के घर में रहने वाली आबीदा ने बताया कि जैसे ही आग लगी, हमने उस घर की महिलाओं को ऊपर आने के लिए कहा। लेकिन वे कमरे में बंद हो गईं और बोलीं- यहां सेफ रहेंगी। धुएं से उनका दम घुट गया और बेहोश हो गईं। मोहल्ले के लोगों ने किसी तरह दरवाजा तोड़कर उनको बाहर निकाला। इंतखाफ ने बताया-सोमवार शाम घर के नीचे की हिस्से में खाना बन रहा था। उम सभी बहुत खुश थे। उमरा (परिवार के साथ मक्का-मदीना की यात्रा) जाने की तैयारी चल रही थी। हादसे में जान गंवाने वाली सादिया भी उमरा जाने वाली थी। उसने अपनी पैकिंग कर ली थी। 10 अप्रैल को सभी की फ्लाइट थी। उमराह से पहले फूल की रस्म सहित कई रस्में होती हैं। ऐसे में तीन दिन पहले सभी को बुला कर खाना खिलाने का प्लान किया था। किसको पता था कि खुशी इतनी जल्दी गम में बदल जाएगी। हिजाब के लिए वापस लौटी और जल गई मोहम्मद इमरान खिलजी ने बताया यह उनकी बुआ का घर था। बुआ की बेटी सादिया अलिमा की पढ़ाई कर रही थी। 11 साल की उम्र से वह पर्दे में ही रहती थी। हादसे के वक्त वह घर की दूसरी मंजिल में एक कमरे में नमाज पढ रही थी। दो घंटे से घरवाले उसे ढूंढ रहे थे। धुएं की वजह से उसकी हालात खराब हो गई थी। उसने जैसे–तैसे अपने चाचा को कॉल किया और बताया कि वह दूसरी मंजिल वाले कमरे में है। फायर ब्रिगेड की टीम, सादिया के चाचा और मैं उसे लेने नीचे पहुंचे। एक बार तो वह चल कर बाहर आई। बाद में उसे याद आया कि वह अपना हिजाब लाना भूल गई है। ऐसे में वह वापस कमरे में गई तो जलता हुआ दरवाजा उस पर गिर गया। किसी तरह दरवाजा हटाकर उसे निकाला। उसे एंबुलेंस में अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में दम तोड़ दिया। मोहम्मद इमरान ने बताया कि घर के एंट्रेंस में दोनों ओर दुकानें बनी हुई थीं। किराणे के सामान के साथ गाड़ियों में हवा भरने का काम भी होता था। खाना ग्राउंड फ्लोर पर बन रहा था। गैस सिलेंडर ब्लास्ट होने पर वहां पड़ा कंप्रेशर भी ब्लास्ट हो गया। घर में चार भाइयों का परिवार मोहम्मद सत्तार चौहान के चार बेटों इकबाल, रफीक, सलीम व साजिद का परिवार इस घर में रह रहा था। सबसे बड़ा बेटा इकबाल घर में ही परचून की दुकान चलाता था। रफीक की सुरसागर में साइकिल की दुकान है। सलीम व साजिद फर्नीचर का काम करते हैं। माेहम्मद सत्तार व उनकी पत्नी का पहले ही इंतकाल हो गया था। इकबाल की पत्नी की भी मौत हो चुकी थी। हादसे के समय रफीक सूरसागर स्थित दुकान पर था। उसकी पत्नी फरीदा बेटा व बहू घर में थे। सलीम व साजिद का परिवार भी घर पर था। रफीक के चार वर्षीय पोते की भी हादसे में मौत हो गई। दहशत में सिलेंडर लेकर भागे लोग पड़ोसी व रिश्तेदार बेबी अब्दुल रहीम ने बताया कि आग के बाद चीख-पुकार मची तो पहले लगा कि शायद झगड़ा हो रहा है। बाहर आकर देखा तो लपटें उठ रही थीं। हम सभी घर के बाहर चले गए। घर में पड़े सिलेंडर भी ब्लास्ट के डर से बाहर निकाल दिए। अब्दुल रसीद गली के बाहर सब्जी बेचने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही आग का पता चला वे मौके पर पहुंचे और बुझाने की कोशिश की। आग बढ़ती जा रही थी। ऐसे में सबसे पहले गली में रखी सभी गाड़ियों को बाहर निकाला। गलियां छोटी होने के कारण फायर ब्रिगेड को भी आने में वक्त लगा। …. जोधपुर सिलेंडर ब्लास्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… जोधपुर में गैस सिलेंडर में ब्लास्ट, दो की मौत:14 लोग झुलसे, 2 बच्चों की हालत गंभीर; मकान में रखे फर्नीचर से भड़की आग जोधपुर में गैस सिलेंडर में ब्लास्ट होने से 14 महीने के बच्चे समेत दो की मौत हो गई और 14 लोग झुलस गए। दो बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है। हादसा एक घर-दुकान में सोमवार शाम हुआ। पूरी खबर पढ़िए…


