हिमाचल सीएम अधिकारियों से नाराज:ग्रामीण योजनाओं पर लेटलतीफी भारी, बजट के बावजूद 11 हजार काम शुरू नहीं, 90 दिन का अल्टीमेटम

हिमाचल सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज विभिन्न विभागों की मीटिंग ली। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं को समय पर पूरा नहीं करने पर सीएम ने नाराजगी जाहिर की और 90 दिनों के भीतर सभी लंबित विकास कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा- प्रदेश सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के सिद्धांत के तहत ग्रामीण क्षेत्र में इन्फ्रॉस्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और गांवों का विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, क्योंकि लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। मगर समीक्षा बैठक में सीएम ने पाया कि कई योजनाओं में धनराशि स्वीकृत होने के बावजूद परियोजनाओं की शुरुआत में देरी हुई। कार्यों की गति बेहद धीमी रही। इनमें पिछड़ा क्षेत्र उप-योजना, एमपीएलएडी, विधायक क्षेत्र विकास निधि, लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड, मुख्यमंत्री ग्राम पथ योजना तथा अन्य विधायक-वित्तपोषित योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाएं शामिल हैं। इन कामों के लंबित होने पर चिंता जताई सीएम ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा- हैंडपंपों की स्थापना, पैदल रास्तों, नालियों, सामुदायिक भवनों, रिटेनिंग वॉल, फुट ब्रिज, सिंचाई नहरों, चारदीवारी और गांवों की सड़कों जैसे छोटे लेकिन आवश्यक कार्य लंबे समय से लंबित हैं। यह सही नहीं है। उन्होंने कहा- सरकार के गठन के बाद से सिस्टम में लबे समय से चली आ रही खामियां दूर कर ग्रामीण विकास व्यवस्था को पुनःस्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कई ऐसे कार्य वर्षों तक लंबित रहे, जबकि उनके लिए धनराशि पहले ही जारी की जा चुकी थी। बजट के बावजूद 11 हजार कार्य शुरू ही नहीं किए गए सीएम ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि 204 करोड़ रुपए की लागत के 11 हजार 064 कार्य शुरू ही नहीं किए गए थे, जबकि 348 करोड़ रुपए की लागत के 16 हजार 834 कार्य लंबे समय से निर्माणाधीन है। उन्होंने बताया कि अक्तूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच सघन निगरानी के चलते 18 हजार 262 कार्य एवं छोटी योजनाएं पूरी की गईं, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी को लाभ मिला। विकास कार्यों की निगरानी ‘रियल-टाइम डैशबोर्ड’ से की जा रही सीएम ने कहा- विकास कार्यों की निगरानी उच्चतम स्तर पर ‘रियल-टाइम डैशबोर्ड’ के माध्यम से की जा रही है। फील्ड अधिकारियों को दैनिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। सीएम ने कहा- सरकार पारदर्शी, आवश्यकता-आधारित और न्यायसंगत विकास मॉडल पर कार्य कर रही है, जिससे सभी विधानसभा क्षेत्रों में समान विकास हो सके। इन विभागों को दिए गए निर्देश जल शक्ति विभाग, लोक निर्माण विभाग, खंड विकास कार्यालयों और पंचायतों सहित सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि स्वीकृत लेकिन रुके हुए अथवा धीमी गति से चल रहे कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाए। इस मीटिंग में सचिव प्लानिंग डॉ. अभिषेक जैन ने विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया- जमीनी सत्यापन और तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए चंबा, कुल्लू और बिलासपुर सहित कई जिलों में फील्ड विजिट और समीक्षा बैठकें की गई हैं। लंबे समय से लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र भी संबंधित एजेंसियों से प्राप्त कर लिए गए हैं। सीएम ने दोहराया कि ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत सरकार लंबित विकास कार्यों को तेजी से पूरा करने, कड़े निगरानी तंत्र को लागू करने और सार्वजनिक धन के सर्वोत्तम उपयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि विकास का लाभ प्रदेश के हर गांव और समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।

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