जालंधर| हिरोशिमा की 80वीं वर्षगांठ पर एजीआई स्कूल में युद्ध के सबसे बुरे प्रभावों विषय पर संगोष्ठी करवाई गई। इसमें बताया गया कि आज की दुनिया में जब युद्ध से भारी तबाही मची हुई है, हम अपने बच्चों को न केवल युद्ध का इतिहास या वर्तमान परिदृश्य पढ़ाने में विश्वास करते हैं, बल्कि उन्हें इसके गहरे मानवीय सबक भी समझाने में मदद करते हैं। एजीआई ग्लोबल स्कूल की अध्यक्ष सलविंदरजीत कौर ने कहा कि एक शक्तिशाली सबक हिरोशिमा की त्रासदी है, जो युद्ध के सबसे बुरे पहलू को दर्शाती है। स्कूल निदेशक हरलीन मोहंती ने कहा कि 6 अगस्त 1945 को जापान का हिरोशिमा शहर युद्ध में इस्तेमाल किए गए पहले परमाणु बम से नष्ट हो गया था। हजारों निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई और कई लोग जलने, बीमारी और विकिरण के दीर्घकालिक प्रभावों के कारण वर्षों तक पीड़ित रहे। स्कूल प्रिंसिपल आरती शर्मा ने कहा कि कहानियों, चित्रों और चर्चाओं के माध्यम से, बच्चों को एक ऐसी दुनिया की कल्पना करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जहां देश लड़ाई से नहीं, बल्कि बातचीत से समस्याओं का समाधान करते हैं।


