हेमू कालानी अल्प आयु में क्रांति की ज्वाला जगाकर अंग्रेजों के आगे झुके नहीं : मनोहर

भास्कर न्यूज | बाड़मेर भारतीय सिंधु सभा बाड़मेर की ओर से बुधवार को सिंधु रत्न हेमू कालानी का 83वें शहादत दिवस नेहरू नगर सिंधी धर्मशाला बाड़मेर में मनाया गया। जिसमें मुख्य अतिथि निरंकारी मिशन के जोनल इंचार्ज शांतिलाल महात्मा, मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक मनोहरलाल बंसल रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोहर बंसल ने कहा कि क्रांतिकारी सभी समाज के होते है। हेमू कालानी ने अल्प आयु में क्रांति की ज्वाला जगाकर अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के आगे झुके नहीं। भारत के विभाजन में सिंधी समाज को बहुत नुकसान हुआ। उस समय संघ ने 1947 में भारतीय समाज की रक्षा की। संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर आज हर हिन्दू के मन में संघ के विचार है। आज समाज संघ के विचारों का सम्मान करता हैं। शांतिलाल महात्मा ने कहा कि वर्तमान परीपेक्ष्य में आध्यात्मिकता के साथ राष्ट्र सेवा और समर्पण भाव ही सच्ची सेवा है। सिंधी समाज से सीए जतिन खेमानी , जितेश ठाकवानी, राम मेघानी को सम्मानित किया गया। वहीं राजकीय सेवा में चयन होने पर प्रदीप मेठाणी, महक सुखपाल, संजय आसवानी को भी सम्मानित किया। रंग भरो प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर लक्षिता जीवनाणी, द्वितीय भाविक आहूजा और गुंजन खूबचंदानी, तृतीय पर रिद्धि मोदयानी को सम्मानित किया गया। भारतीय सिंधु सभा के नव पदाधिकारी की घोषणा की गई। जिसमें दिलीप बादलानी और कुणाल केवलानी को भारतीय सिंधुसभा प्रदेश युवा ईकाई कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत किया गया। इस अवसर पर संरक्षक मिर्चूमल कृपलानी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भगवानदास ठारवानी, जिलाध्यक्ष हरीश जीवनानी, महामंत्री दिलीप तनसुख़ानी, नगर अध्यक्ष दुर्गेश मंघानी, गोपाल एस जीवनानी, बन्नाराम वाधवानी, हरदासमल वृजानी, जितेंद्र अमलानी, पेसूमल खेमानी, मनोज खुबचंदानी, प्रताप सेवकानी, दीपक खत्री, रमेश सायानी, मनीष झामनानी, प्रदीप तनसुखानी, दिलीप बादलानी, प्रियंका खेमानी, कनक सुखपालानी, ममता सुखपाल, गायत्री खुबचंदानी सहित भारतीय सिंधु के समस्त अधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। मंच संचालन दिलीप बादलानी ने किया। हेमू कालानी प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण कर राष्ट्रगान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की गई। शहीद स्मारक पर अमर शहीद हेमू कालाणी के जीवन और बलिदान पर आधारित नाट्य मंचन किया गया। नाट्य प्रस्तुति के लेखक व निर्देशक गोपी किशन शर्मा रहे। उन्होंने बताया कि केवल 19 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने वाले हेमू कालाणी की भूमिका में गोविंद सिंह परमार ने अभिनय किया। अंग्रेजी शासन की क्रूरता को उजागर करते हुए इंस्पेक्टर की भूमिका में जसवंत राज ने अत्याचारी चेहरे को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। जबकि कर्नल रिचर्डसन की भूमिका में श्रवण सिंह चौहान ने सख्त और निर्दयी शासक का सजीव चित्र खींचा। जज व नौकर की दोहरी भूमिका में अभि गोयल का अभिनय विशेष रूप से प्रशंसनीय रहा। पुलिस की भूमिकाओं में नैतिक, जसराज और भूपेंद्र ने निभाई। जल्लाद के किरदार में पवन और वकील की भूमिका में सुरेश ने मंचन को और अधिक गंभीरता प्रदान की। नाट्य मंचन में दर्शाया गया कि किस प्रकार हेमू कालाणी, जिन्हें इतिहास में सिंध का भगतसिंह कहा जाता है, ने अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध आवाज उठाई और देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया।

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