चित्तौड़गढ़ में चल रही राष्ट्रीय स्तर की हैंडबॉल प्रतियोगिता इन दिनों खेल के साथ-साथ स्वाद को लेकर भी चर्चा में है। देशभर से आए खिलाड़ी और कोच यहां के राजस्थानी खाने की जमकर तारीफ कर रहे हैं। रोजाना एक समय में करीब 1700 से 1800 लोगों का भोजन बन रहा है, जिसमें एक टाइम में लगभग 3 क्विंटल आटा, 400 किलो सब्जी दोनों टाइम और 70 किलो चावल एक टाइम के लिए तैयार किया जा रहा है। कई राज्यों में नॉनवेज खाने का रूटीन होता है, लेकिन यहां आए खिलाड़ियों का कहना है कि राजस्थानी स्वाद इतना अच्छा है कि अब उन्हें नॉनवेज की भी याद नहीं आती। दाल-चावल सबकी पसंदीदा खाना घटियावली स्कूल के प्रिंसिपल एवं भोजनशाला प्रभारी दीनदयाल नारायणीवाल ने बताया कि प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों और स्टाफ के लिए चार टाइम भोजन की व्यवस्था की गई है। सुबह ब्रेकफास्ट दिया जाता है, इसके बाद लंच होता है। लंच के बाद चाय और हल्का ब्रेकफास्ट दिया जाता है और शाम को डिनर रहता है। दाल-चावल भोजन का नियमित हिस्सा है। एक बात अच्छी लगी कि दाल-चावल हर स्टेट के लोगों को पसंद है। इसके साथ एक सब्जी, रोटी-चपाती, एक मिठाई और हर बार एक राजस्थानी स्पेशल आइटम जरूर परोसा जाता है, ताकि बाहर से आए बच्चों को यहां के खाने का सही अनुभव मिल सके। राजस्थानी खाने के स्वाद से खुश हुए मेहमान देश के अलग-अलग राज्यों से आए खिलाड़ियों की खाने की आदतें भी अलग-अलग हैं। दीनदयाल नारायणीवाल ने बताया कि पहले दिन कुछ बच्चों को खाना थोड़ा अलग लगा, लेकिन दूसरे दिन से ही सबका मन बन गया कि यहां का खाना स्वादिष्ट और हल्का है। राजस्थान आने के बाद अब बच्चों को यहां के पारंपरिक डिश परफेक्ट तरीके से परोसे जा रहे हैं। धीरे-धीरे सभी खिलाड़ी राजस्थानी स्वाद के आदि हो गए और अब खाने की तारीफ करते नहीं थक रहे। बिना तेल का खाना खुद बनाती है हिमाचल प्रदेश की टीम भोजन बनाते समय खास ध्यान नमक और मिर्च के अनुपात पर रखा गया है। सभी कोच से बातचीत कर यह तय किया गया कि खाना न ज्यादा नमकीन हो और न ज्यादा तीखा, ताकि खेल प्रदर्शन पर कोई असर न पड़े। इसी वजह से तली हुई मिर्ची अलग से रखी गई है और शक्कर भी ओपन रखी गई है। जिसे मीठा चावल चाहिए, वह अपनी पसंद से ले सकता है। प्रतापगढ़ का प्रसिद्ध जीरावन भी रखा गया है। उड़ीसा से आई टीम के कोच ने बिना तेल और नामक का खाना मांगा, तो उन्हें मसाले अलग से देकर अपनी पसंद से खाना बनाने की सुविधा दी गई। शुद्ध शाकाहारी खाने की खास पहचान सेमलपुरा स्कूल के शारीरिक शिक्षक एवं भोजनशाला के सह प्रभारी सुनील कुमार सेठिया ने बताया कि कई बच्चों से फीडबैक लिया गया। नॉनवेज खाने वाले बच्चों ने भी कहा कि यहां शुद्ध शाकाहारी खाना इतना अच्छा मिल रहा है कि उन्हें नॉनवेज की जरूरत ही महसूस नहीं हुई। पूरा खाना शुद्ध वेज है, अंडा तक शामिल नहीं है। कुछ टीमों ने नॉनवेज की डिमांड की थी, लेकिन जब उन्होंने यहां का खाना चखा, तो वे खुद ही संतुष्ट हो गए। हर राज्य की पसंद को जगह देने की कोशिश भोजनशाला में यह कोशिश की गई कि हर दिन किसी न किसी राज्य की एक खास डिश मेनू में शामिल हो। गुजरात का खमन, साउथ की इडली-सांभर, वेस्ट बंगाल की मिठाई, पंजाब के छोले, महाराष्ट्र की सिंगदाना वाली डिश भी बनाई गई। इससे बच्चों को अपने राज्य का स्वाद भी मिला और नई चीजें चखने का मौका भी। कई बच्चों ने पहली बार दही बड़ा, कड़ी पकौड़ा, मक्खन बड़ा और अलग-अलग तरह के पापड़ खाए। पोहा और दही बड़े को समझ बैठे मिठाई सुनील कुमार सेठिया ने बताया कि एक दिन नाश्ते में पोहा बनाया गया। साउथ के बच्चों ने पहले कभी पोहा नहीं खाया था, इसलिए वे उसे मिठाई समझ बैठे। इसी तरह कई बच्चों ने दही बड़ा को लड्डू समझ लिया। जब उन्हें बताया गया कि यह दही बड़ा है, तो उन्होंने हंसते हुए चखा और पसंद भी किया। यह सभी के लिए खुशी और गर्व की बात रही कि अलग-अलग राज्यों के बच्चे यहां नई चीजें खाकर खुश हो रहे हैं। पूरा मेनू सोच-समझकर किया गया तय यह पूरा भोजन प्रबंध टीमवर्क का नतीजा है। भोजनशाला टीम ने उन साथियों से सलाह ली, जो पहले नेशनल प्रतियोगिताओं में जा चुके हैं। जिला शिक्षा अधिकारी, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी और अन्य अधिकारियों से भी चर्चा की गई। हाल ही में जो टीम नेशनल खेलने गई थी, वहां के मेनू को भी देखा गया। अलग-अलग जगहों के मेनू को मिलाकर एक संतुलित सूची तैयार की गई और उसे ACFI लखनऊ से अप्रूव कराया गया। इसके अलावा क्या बनने वाला है, उसकी पूरी लिस्ट बीकानेर शिक्षा विभाग निदेशक को दी गई थी। 1700 से 1800 लोगों का बन रहा है खाना भोजन ठेकेदार आशीष बजाज ने बताया कि रोजाना एक टाइम में 1700 से 1800 लोगों का खाना बनाया जा रहा है। इसमें एक टाइम में करीब 2 क्विंटल 80 किलो आटा, दोनों टाइम मिलाकर 400 किलो सब्जी, एक टाइम में 70 किलो चावल, दोनों समय के लिए 4 क्विंटल दूध इस्तेमाल होता है। इसके अलावा रोज करीब 20 किलो जैम, 15 लीटर के 6 टीन तेल और 3 टीन घी की खपत हो रही है। खेल के साथ संस्कृति की भी जीत राष्ट्रीय हैंडबॉल प्रतियोगिता में चित्तौड़गढ़ ने न सिर्फ खेल आयोजन में, बल्कि भोजन व्यवस्था में भी मिसाल पेश की है। राजस्थानी व्यंजनों के जरिए यहां आने वाले खिलाड़ियों को राज्य की संस्कृति और स्वाद से रूबरू कराया जा रहा है। खिलाड़ी खुश हैं, कोच संतुष्ट हैं और आयोजक गर्व महसूस कर रहे हैं कि खेल के इस महाकुंभ में स्वाद और सेहत दोनों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश की टीम मैनेजर कामना शर्मा ने बताया कि यहां खाना बहुत अच्छा है। सुबह का नाश्ता, दोपहर का और शाम का खाना, बच्चों का रिफ्रेशमेंट भी अच्छा है। मैनेजमेंट बहुत अच्छा है और हर चीज बहुत अच्छे से मैनेज की गई है। हर तरह की प्रॉब्लम के लिए इन्होंने एक वॉट्सऐप ग्रुप बना रखा है, जिसमें बार-बार पूछा जाता है और हर किसी की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। इनका ट्रेडिशनल राजस्थान का खाना बहुत अच्छे से रिप्रजेंट किया गया है। मुझे छाछ बहुत अच्छी लगी। एक रात राजस्थानी मेथी की सब्जी थी, वो भी बढ़िया रही। बाकी खाने में मिक्स कॉम्बिनेशन रखा गया है। साउदर्न लोगों के लिए साउथ का खाना भी दिया गया है। इडली और सांभर दिया गया है। नॉर्थ वालों के लिए पूड़ी भी दी गई है, क्योंकि वहां फ्राइड खाना पसंद किया जाता है। इस तरह मिलाजुला कॉम्बिनेशन बहुत अच्छा है। हम पहली बार चित्तौड़गढ़ आए हैं। चित्तौड़गढ़ का नाम हमने सुना था और बच्चों को भी पढ़ाते हैं, इसलिए भक्ति और शक्ति की जगह होने के कारण यहां आने का क्रेज था। जैसे ही पता चला कि चित्तौड़ में आयोजन हो रहा है, हम लोग बच्चों को लेकर आए। बच्चों को किला भी घुमाया गया और पूरा इतिहास बताया गया। किला बहुत अच्छा लगा और हॉस्पिटैलिटी भी बहुत अच्छी है। यहां के लोग बहुत आदरणीय हैं और आदर भाव से रखते हैं। बहुत अच्छा लगा। उम्मीद है कि आगे भी यहां और टूर्नामेंट कंडक्ट होंगे। इससे भी अच्छा इंतजाम मिलेगा और हम भी पूरा योगदान देंगे। वेस्ट बंगाल से चेताली घोष ने बताया कि यहां आकर बहुत अच्छा लगा। खाना बहुत अच्छा लगा। हम तो नॉनवेज खाना ही भूल गए, इतना अच्छा खाना बन रहा है। भटिंडा की CBSE टीम से निम्रत ने बताया कि खाना बहुत टेस्टी है। खासकर गुलाब जामुन और पुड़ी बहुत स्वादिष्ट हैं। पुडुचेरी से यावदिन नादन ने बताया कि मैं हैंडबॉल कोच हूं और अंडर-14 बॉयज टीम को हैंडल कर रहा हूं। खाना बहुत अच्छा है। आज और पिछले तीनों दिनों में हमें अच्छा खाना, अच्छा आवास मिला है, साथ ही राजस्थान के लोगों की मेहमान नवाजी भी बहुत अच्छी है और सब कुछ अच्छा है।


