1 घंटे के राजा बने कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रियव्रत सिंह:राजगढ़ में पूर्व मंत्री को देखने गांवों से पहुंचे लोग; दशहरे बाद अनोखा मिलन समारोह

राजगढ़ जिले के खिलचीपुर राजमहल में शुक्रवार को दशहरा मिलन समारोह का नजारा बिल्कुल रियासत काल की याद दिलाने वाला था। जहां एक ओर आम लोग अपने नेता को साधारण परिधान में हर रोज देखते हैं, वहीं इस दिन पूर्व ऊर्जा मंत्री और कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रियव्रत सिंह शाही लिबास, सिर पर साफा और हाथ में तलवार लिए कुर्सी पर बैठे नजर आए। उनके इस राजसी अंदाज को देखने के लिए न खिलचीपुर नगर सहित आसपास के गांवों से भी लोग बड़ी संख्या में राजमहल पहुंचे। रियासत काल की जीवंत परंपरा
खींची राजपरिवार दशहरे के अगले दिन दशहरा मिलन समारोह का आयोजन कर इस परंपरा को जीवित रखे हुए है। राजमहल के विशाल हाल में लगी कुर्सी पर राजसी वस्त्र पहने प्रियव्रत सिंह बैठे थे। लोगों के सामने यह नज़ारा किसी ऐतिहासिक दृश्य से कम नहीं था। हर कोई अपने राजा की झलक पाने को उत्सुक था। लोग रूमाल पर अपनी इच्छा अनुसार पैसे रखकर लाते, गद्दी पर बैठे प्रियव्रत सिंह का हाथ टच करवा कर उन पर पैसे न्योछावर करते और फिर बधाई देते। यह क्षण लोगों के लिए आस्था और परंपरा दोनों का प्रतीक था। इत्रदानी से स्वागत, राजमहल में रौनक
इस मिलन समारोह में अतिथियों के स्वागत के लिए रियासत कालीन परंपरा निभाते हुए इत्रदानी से इत्र लगाया गया। महल में चारों ओर दशहरे की खुशबू, और पुराने दौर का एहसास लोगों को भव्य अनुभव दे रहा था। करीब एक घंटे तक यह आयोजन चला, जिसमें हर वर्ग के लोग शामिल हुए। यही वह क्षण होता है जब लोग अपने पूर्वजों की परंपरा को जीवित देखते हैं। फिर साधारण जीवन में लौटते हैं प्रियव्रत सिंह
कार्यक्रम के बाद प्रियव्रत सिंह ने महल में बने कुल देवी मंदिर में दर्शन किए और फिर शाही लिबास उतारकर साधारण परिधान में आमजन के बीच पहुँच गए। यह बदलाव लोगों के लिए उतना ही खास था, क्योंकि उनके लिए यह संदेश था कि परंपरा निभाने के साथ-साथ वे आज भी आम जनता के बीच एक साधारण इंसान की तरह जुड़े हुए हैं। साल भर की प्रतीक्षा, सिर्फ़ एक घंटे का ‘राजा’
खिलचीपुर और आसपास के लोगों के लिए यह दिन खास महत्व रखता है। साल भर वे इस एक मौके का इंतजार करते हैं, जब प्रियव्रत सिंह अपने पूर्वजों की परंपरा को निभाते हुए शाही अंदाज़ में नज़र आते हैं। सिर्फ़ एक घंटे का यह क्षण लोगों के लिए आस्था, गर्व और इतिहास का जीवंत प्रतीक बन जाता है।

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