10 जनवरी से 6 फरवरी तक प्रदेश में आंदोलन करेगी:कई साल बाद साथ दिखे हरीश और मेवाराम, कांग्रेस का 45 दिन सड़क संग्राम का ऐलान

जयपुर| बजट सत्र से पहले राजस्थान में कांग्रेस ने आंदोलन तेज करने का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को जयपुर के तोतूका भवन में पार्टी की बड़ी मीटिंग हुई। प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी, जिलाध्यक्षों, सांसदों, विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और विभाग-प्रकोष्ठों की बैठक में आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। पीसीसी चीफ गोविंदसिंह डोटासरा ने ऐलान किया कि मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ 45 दिन पार्टी का हर कार्यकर्ता सड़कों पर संग्राम करेगा। पीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि इनकी विचारधारा नाथूराम गोडसे की है और हमारी महात्मा गांधी की है। इसलिए कांग्रेस ने गांधीजी का नाम दिया था। इस आंदोलन का नाम ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ रखा गया है। इस बड़ी बैठक में कई साल बाद बाड़मेर के मेवाराम जैन और हरीश चौधरी एक साथ दिखे। हरीश मंच पर थे, मेवाराम नीचे बैठे। अब लड़ाई गांव और चौपालों में होगी: डोटासरा ने ऐलान किया कि अब मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ लड़ाई गांवों और चौपालों में होगी। 1 जनवरी को सभी जिलों में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। 11 को उपवास और 12 तारीख से गांव-गांव, चौपालों में जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। अभियान के अंतिम चरण में बड़ी सभाएं भी होंगी। 10 जनवरी से 6 फरवरी तक सभी जिलों में आंदोलन होगा। मनरेगा का बोझ राज्य कैसे उठाएगा: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार का वास्तविक मकसद इस योजना को खत्म करना है। नाम बदलना महज नाटक है। असल नीयत गरीब के पेट पर लात मारना है। अब दिल्ली से तय होगा कि राजस्थान को कितना फंड मिलेगा और मजदूर क्या काम करेंगे? मुख्यमंत्री खुद सरपंच रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि यह व्यवस्था ग्रामीणों के लिए आफत बनेगी।डोटासरा ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि इनकी विचारधारा नाथूराम गोडसे की विचारधारा है। यूपीए सरकार के समय ‘राइट टू वर्क’ यानी ‘काम का अधिकार’ दिया गया था। उसे इन्होंने खत्म कर दिया। प्रभारी नहीं सह प्रभारी आए बैठक में राजस्थान के प्रभारी नहीं थे। एआईसीसी के सचिव एवं सह प्रभारी राजस्थान रित्विक मकवाना, मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, एआईसीसी सचिव धीरज गुर्जर, दानिश अबरार, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, डॉ. बी.डी. कल्ला, डॉ. चन्द्रभान सहित कांग्रेस सांसद, विधायक, विधायक प्रत्याशी, प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य, जिलाध्यक्ष आदि शामिल हुए।

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