10 डिग्री पारे में खुले में सो रहे किसान:नर्मदापुरम में धान बेचने 3-4 दिन का इंतजार; मंडी में अलाव नहीं, ओस में भीग रहे कंबल

नर्मदापुरम में कड़ाके की ठंड के बीच किसान अपनी उपज बेचने के लिए खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं। संभागीय मुख्यालय स्थित अनाज मंडी में नर्मदांचल विपणन सहकारी समिति के खरीदी केंद्र पर अव्यवस्थाओं के चलते किसानों को 10 से 11 डिग्री तापमान में अपनी ट्रॉलियों पर रात गुजारनी पड़ रही है। रविवार रात मंडी में 150 से ज्यादा ट्रॉलियां कतार में खड़ी थीं और किसान फसलों की सुरक्षा के लिए ठंड में ठिठुरते हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। यहां अलाव तक की व्यवस्था नहीं है। दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने रविवार रात मंडी परिसर का जायजा लिया, तो वहां कहीं भी अलाव जलते नहीं दिखे। मंडी में धान से भरी 150 से ज्यादा ट्रॉलियां खड़ी थीं। अलग-अलग तीन ट्रॉलियों पर धान के ऊपर किसान सोते नजर आए। रिपोर्टर ने देखा कि किसान तिरपाल और चढ़ाई के अंदर तीन-चार कंबल ओढ़कर लेटे हैं। ठंड और ओस के कारण तिरपाल के नीचे वाला कंबल भी गीला हो चुका था। किसान बोले- चोरी के डर से ट्रॉली पर सोना मजबूरी आंचलखेड़ा के किसान राजू यादव ने बताया, “मंडी में तीन दिन से आया हूं। रात में फसल की सुरक्षा के लिए रोजाना ट्रॉली पर ही सो रहा हूं। ठंड और ओस से बचाव के लिए तीन कंबल डालते हैं। सुबह तक एक कंबल ओस से गीला हो जाता है।” वहीं, डोंगरवाड़ा के किसान राकेश कीर ने बताया, “रात में परिसर में अलाव जलाने की कोई व्यवस्था नहीं है। फसल और ट्रैक्टर के सामान चोरी होने का डर रहता है, इसलिए मजबूरन ट्रॉलियों पर ही ठंड में सो रहे हैं।” तुलाई में लग रहे 3 से 4 दिन मंडी में बने केंद्र पर किसानों को धान बेचने में तीन से चार दिन का वक्त लग रहा है। प्रक्रिया के तहत किसानों को पहले बड़े तौल कांटे पर नंबर लगाना पड़ता है। यहां पहले भरी ट्रॉली और फिर खाली ट्रॉली के नंबर लगते हैं। इस बीच उनकी फसल को खरीदा जाता है। लंबी प्रक्रिया के कारण किसानों को कई रातें मंडी में ही बितानी पड़ रही हैं। मंडी सचिव बोले- अलाव जलाना समिति की जिम्मेदारी नियमों के अनुसार, उपार्जन केंद्रों पर सीजन के हिसाब से सुविधाएं देना समिति की जिम्मेदारी है। गर्मी में टेंट और ठंड में अलाव व सोने की व्यवस्था होनी चाहिए, जो यहां नजर नहीं आ रही। अनाज मंडी के सचिव रामनाथ इवने का कहना है कि आज से तेज ठंड पड़ रही है, इसलिए सोमवार से अलाव जलाने का कह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मंडी में फसल बेचने वाले 25-30 किसान ही रोजाना आते हैं और उनकी फसल दिन में बिक जाती है। जबकि परिसर में उपार्जन खरीदी चल रही है, जहां अलाव की व्यवस्था करना समिति का काम है।

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