10 मजदूरों के शव गुजरात से एमपी लाए जा रहे:अंतिम संस्कार कल; पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में हरदा-देवास के 20 लोगों की मौत हुई है

गुजरात में एक पटाखा फैक्ट्री का बॉयलर फटने से मृत 10 मजदूरों के शव मध्यप्रदेश लाए जा रहे हैं। शव लेकर निकलीं सभी एम्बुलेंस गुरुवार को ही संदलपुर और खातेगांव पहुंच पाएंगी। गुरुवार को अंतिम संस्कार होगा। बता दें, हादसा मंगलवार सुबह 8 बजे गुजरात के बनासकांठा के नजदीक डीसा में हुआ। सभी मजदूर हरदा और देवास जिले के रहने वाले थे। इस हादसे में अब तक 20 शव बरामद हुए हैं। इनमें से 18 की पहचान हो गई है। इनमें 5 से 8 साल तक के बच्चे भी हैं। फैक्ट्री में धमाका इतना भीषण था कि कई मजदूरों के शरीर के अंग 50 मीटर दूर तक बिखर गए। फैक्ट्री के पीछे खेत में भी कुछ मानव अंग मिले हैं। 8 शव हरदा के, 10 देवास जिले के परिवार के
8 शव हरदा के परिवार के जबकि 10 देवास जिले के हैं। दो शव ज्यादा जले हैं, जिनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट किया जाएगा। माना जा रहा है कि ये हरदा के ही हैं। पहले हादसे में 21 मजदूरों की मौत की बात सामने आई थी। घायल मजदूरों से मिले मंत्री नागर सिंह चौहान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मंत्री नागर सिंह चौहान अधिकारी-कर्मचारियों के साथ मंगलवार देर रात गुजरात के बनासकांठा पहुंचे। उन्होंने घायल श्रमिकों और उनके परिजन से मुलाकात कर हाल-चाल जाना। मंत्री चौहान ने घायलों के परिजन से बात कर उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही राज्य सरकार की ओर से सभी घायल मजदूरों के उचित इलाज और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद दिलाने का आश्वासन भी दिया। मंत्री ने बनासकांठा जिले के डीसा अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों के इलाज के लिए उचित प्रबंध के निर्देश दिए। साथ ही घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी करेगा। एम्बुलेंस के जरिए एमपी लाए जा रहे सभी शव
8 मजदूरों का इलाज चल रहा है। इनमें 3 की हालत गंभीर है। ठेकेदार और हरदा परिवार का एक सदस्य लापता है। शव लेने पुलिस-प्रशासन टीम के साथ मंत्री नागर सिंह भी गुजरात गए हैं। बुधवार सुबह उन्होंने बताया कि देवास के 10 मजदूरों के शव उनके पैतृक गांव के लिए रवाना किए जा चुके हैं। बाकी शव भी पोस्टमॉर्टम के बाद भिजवाए जाएंगे। एम्बुलेंस में तकनीकी खराबी, दाहोद में बदली गई
सूत्रों के मुताबिक खातेगांव और संदलपुर के लिए गुजरात से आ रहीं सभी एम्बुलेंस और उनके साथ चल रहे गुजरात प्रशासन की ओर से अश्विन सिंह राठौर, नायब तहसीलदार और उनकी टीम शाम 6 बजे दाहोद से निकलने की तैयारी में थी। इसी बीच एक एम्बुलेंस में तकनीकी खराबी आ गई। इसके बाद एम्बुलेंस बदली गई है। कल नेमावर में नर्मदा तट पर अंतिम संस्कार
देवास जिले में एक साथ इतने शवों को आइस बॉक्स में रखने की सुविधा नहीं है। इसलिए सभी शवों को इंदौर एमवाय अस्पताल की मॉर्चुरी में रखा जाएगा। गुरुवार सुबह इंदौर से शवों को संदलपुर लाया जाएगा। अंतिम संस्कार नेमावर में नर्मदा तट पर किया जाएग। परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल
पटाखा फैक्ट्री हादसे में मारे गए मृतकों के रिश्तेदार लगातार हंडिया गांव पहुंचकर परिजन को सांत्वना दे रहे हैं। इस बीच परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चों सहित परिवार के सभी लोग सुबह से भूखे-प्यासे शवों के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। सीएम बोले- लोगों के प्रति सरकार की संवेदनाएं
सीएम डॉ मोहन यादव ने X पर लिखा-गुजरात में हुई घटना में अपने लोग मारे गए और घायल हुए। मंत्री नागर सिंह को वहां भेजा था, घायलों की मदद करने की भी कार्रवाई चालू की थी। अपनी तरफ से भी हमने 2-2 लाख रुपए की राशि मृतकों के परिवारों को और घायलों को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उम्मीद करेंगे कि रोजगार के लिए जहां भी जो जाए तो आत्मरक्षा की चिंता भी करे। ऐसी चीजों से परिवार वालों को भुगतना पड़ता है। बड़ा दर्दनाक हादसा था। हम भगवान से प्रार्थना करेंगे की मृतकों को मोक्ष प्राप्ति हो। इस खबर के मिनट-टु-मिनट अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए… मामले से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें…
मां ने रोका, फिर भी पटाखा बनाने गया, मिली मौत
एक साल पहले हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में जिंदा बचे शख्स राकेश की गुजरात पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में मौत हो गई। हरदा ब्लास्ट के बाद मां शांताबाई इतनी डरी हुई थी कि राकेश को गुजरात जाने से खूब रोका, लेकिन वह नहीं माना। चार दिन बाद राकेश, उसकी पत्नी डाली और बेटी किरण की मौत की खबर आई। पढ़ें पूरी खबर… बेटे की तेरहवीं करनी थी, रुपए कमाने गए गुजरात: मां बोली-सब खत्म हो गया
हरदा के हंडिया की गीताबाई का पूरा परिवार गुजरात फैक्ट्री ब्लास्ट में खत्म हो गया। दैनिक भास्कर ने गीता से बात की तो बोलीं- होली पर बेटे सत्यनारायण का निधन हो गया था। उसकी तेरहवीं के लिए रुपए नहीं थे। पोते समेत परिवार के 11 लोग काम करने गुजरात गए थे। पढ़ें पूरी खबर…

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