भास्कर न्यूज| महासमुंद कहते हैं कि अन्नदाता केवल पेट भरना ही नहीं, बल्कि जीवन की खुशियां बांटना भी जानते हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण पेश कर रही है महासमुंद के अंवराडबरी की कृषक नेत्र एवं कल्याण समिति। समिति के सदस्य आपस में चंदा कर 1987 से निशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन करते आ रहे हैं। अब तक 10 हजार से अधिक मरीजों की मोतियाबिंद इलाज करवा चुके हैं। समिति ने हाल ही में 20 जनवरी को अंवराडबरी के विश्राम गृह में निशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया, जिसमें 125 मरीजों ने पंजीयन कराया। यह शिविर का 39वां साल रहा। शिविर में 55 मरीजों का सफल ऑपरेशन जांच के दौरान 55 मरीजों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई। समिति ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इन सभी मरीजों को जिला नेत्र चिकित्सालय महासमुंद और रायपुर के निजी अस्पतालों में भेजकर उनका सफल ऑपरेशन कराया। खास बात यह है कि मरीजों के घर से अस्पताल ले जाने, वहां रहने, भोजन और दवाइयों से लेकर वापस घर तक छोड़ने की पूरी व्यवस्था समिति द्वारा निशुल्क की गई। महासमुंद जिले के किसानों ने सेवा की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो न केवल प्रेरणादायक है बल्कि समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी देती है। यह कोई एक दिन की कोशिश नहीं है। समिति के सचिव कुबेर गिरी गोस्वामी ने बताया कि अंवराडबरी की यह समिति वर्ष 1987 से निरंतर निश्चित तिथि और स्थान पर नेत्र शिविर आयोजित करती आ रही है। इस समिति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल किसान ही सदस्य हैं और वे अपनी स्वयं की गाढ़ी कमाई से इन शिविरों का खर्च वहन करते हैं। आज जब चिकित्सा सेवाएं महंगी होती जा रही हैं, अंवराडबरी के इन किसानों की निस्वार्थ सेवा ने क्षेत्र की जनता का दिल जीत लिया है। इस समिति का गठन साल 1985-86 में किसान स्व. नायक राम चंद्राकर, डॉ. थानसिंह चंद्राकर, पुष्कर चंद्राकर सहित अन्य ने सेवा भाव से किया था।


