भास्कर न्यूज | कवर्धा कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था में इस बार एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इसे लेकर लगातार प्रशासनिक निगरानी और सख्ती के चलते बिचौलियों और कोचियों पर प्रभावी रोक लगी है। इसका नतीजा यह हुआ कि 21,058 किसानों ने 623 हेक्टेयर यानी करीब 1540 एकड़ रकबा समर्पित कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, यदि इस रकबे से प्रति एकड़ औसतन 21 क्विंटल धान की खरीदी होती, तो 32,340 क्विंटल धान सरकारी सिस्टम में जाता। सरकारी दर 3,100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से देखें तो सरकार को करीब 10.20 करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ता। जानकारी के अनुसार, यह राशि वास्तविक किसानों की बजाय बिचौलियों तक भी पहुंच सकती थी। लेकिन प्रशासन की सतर्कता से संभावित फर्जी खरीदी पर ब्रेक लग चुका है। रकबा समर्पण कराने की प्रक्रिया अभी चल रही है। किसानों से सहमति पत्र भरवाए जा रहे हैं। बताया गया कि खरीफ सीजन में फिलहाल इस बार 30 जनवरी तक समर्थन मूल्य में किसानों से धान की खरीदी की जाएगी। जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा के अनुसार जिले में 108 केंद्रों के जरिए धान खरीदी जा रही है। 23 जनवरी की स्थिति में किसानों से 5.60 लाख टन धान की खरीदी हो चुकी है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित है। लेकिन 31 जनवरी को शनिवार होने के कारण 30 जनवरी तक केंद्रों में खरीदी होगी। यानी अब किसानों और प्रशासन दोनों के लिए सिर्फ 7 दिन का समय बचा है। यही वजह है कि खरीदी केंद्रों पर दबाव बढ़ गया है। प्रशासन पूरी व्यवस्था पर लगातार निगरानी कर रहा है। सभी 108 केंद्रों में ऐसे किसानों की पहचान की जाएगी, जिन्हें धान बेचने में समस्या आ रही है। प्रशासन ने यह तय किया है कि समिति वार और केंद्रवार ऐसे किसानों की सूची तैयार की जाएगी। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि किसान को किस कारण धान बेचने में समस्या आ रही है। सूची में यह भी दर्ज किया जाएगा कि समस्या कैरी फॉरवर्ड, रकबा संशोधन, नया पंजीयन, एग्री स्टेक या किसी अन्य कारण से संबंधित है। यदि किसी किसान का धान खरीदी से छूट गया है, तो उसकी पूरी जानकारी समिति स्तर पर संधारित की जाएगी। सूची उच्च स्तर पर भेजी जाएगी। ताकि शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई कर समाधान निकाला जा सके।


