राजस्थान में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों से 50 करोड़ से ज्यादा की ठगी कर ली गई। इस ठगी का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, उन्हीं का साथी पुलिस वाला है। उसने एक कंपनी में इन्वेस्टमेंट के नाम पर चार गुना मुनाफे का लालच दिया। दावा करता था कि कुछ ही महीने में सभी पुलिसकर्मियों को करोड़पति बना देगा। झांसे में आए किसी पीड़ित ने घर-जमीन बेचकर पैसा लगाया। किसी ने पत्नी के गहनों पर लोन उठाकर इन्वेस्ट किया। एक पुलिसकर्मी ने तो 1 करोड़ रुपए ठग को इन्वेस्ट के लिए दिए थे। फिलहाल, ठगी को अंजाम देने वाला मास्टरमाइंड फरार है। अजमेर जिले में हुई इस ठगी की पड़ताल के लिए भास्कर टीम मौके पर पहुंची। पीड़ितों से मिलकर उसका ठगी का तरीका जाना। पढ़िए- संडे बिग स्टोरी…. अजमेर के कई थानों में पीड़ित, हर जगह 8-10 शिकार भास्कर टीम अजमेर के क्लॉक टावर थाने पहुंची। पता चला 8-10 लोगों से एक ही थाने में ठगी हुई है। कॉन्स्टेबल दीपक वैष्णव ने 9 अप्रैल 2025 को क्लॉक टावर थाने में 1 करोड़ की ठगी होने का मुकदमा दर्ज कराया था। दीपक ने बताया कि ठगी का मास्टरमाइंड पुलिस लाइन में पोस्टेड कॉन्स्टेबल पवन मीणा है। करौली का रहने वाला पवन मेरा बैचमेट है, इसलिए पहले से जान-पहचान थी। अक्सर मुझसे मिलने थाने आता था। इस दौरान उसकी यहां कुछ दूसरे पुलिसकर्मियों से भी जान-पहचान हो गई थी। पवन जब भी आता, नेशनल हाईवे पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट और उसमें करोड़ों रुपए इन्वेस्टमेंट से चौगुनी कमाई की बातें करता था। एक बार अगस्त-2023 में पवन थाने आया। इस दौरान उसने कहा- भाई देखो नौकरी की तनख्वाह से घर का गुजारा भी नहीं चला सकते। जीवन में कुछ बड़ा सोचो। पवन मीणा ने बताया- करौली में अभी हाईवे के कई बड़े-बड़े प्रोजेक्ट आ रहे हैं। एक हाईवे के मास्टर प्लान में जहां से बाईपास निकलेगा, उसकी जानकारी मेरे बड़े भाई कुलदीप को पहले से है। वो वहां सीनियर सरकारी टीचर है। अगर अभी मेरे कहने से मास्टर प्लान में हाईवे पर आ रही जमीनों में इन्वेस्टमेंट करोगे तो कुछ ही महीनों में करोड़पति बन जाओगे। पवन ने कहा- दीपक तुम तो अजमेर जिले के रहने वाले हो। यहां के कई अमीर लोगों के साथ तुम्हारे रिलेशन भी होंगे। अगर तुम इन सबसे बात कर करीब 2 करोड़ रुपए का फंड जुटाकर इन्वेस्टमेंट करो तो तुम्हारे लिए गोल्डन चांस है। खुद पार्टनर ढूंढकर लाया इस बातचीत में मना करने के बाद वो चला गया, लेकिन दो दिन बाद ही राजकुमार विश्नोई और पुखराज चौधरी नाम के दो व्यक्तियों को साथ लेकर थाने आया। उसने बताया कि कि ये दोनों 25-25 लाख रुपए इन्वेस्ट करने को तैयार हैं। इसके अलावा 50 लाख हम दोनों भाई लगा रहे हैं। अब 1 करोड़ का इंतजाम हो गया है। बाकी एक करोड़ रुपए के लिए पार्टनर की व्यवस्था हो जाए तो काफी सस्ती जमीनें हाथ आ जाएंगी। फिर इतनी कमाई होगी, जो सपने में भी नहीं सोच सकते। पवन ने अपने भाई कुलदीप से वीडियो कॉल पर बात कराई। उसके 2-3 दिन बाद कुलदीप पर्सनली मिलने थाने भी आया। उसी तरह दोगुनी-चौगुनी कमाई की बातें करने लगा। दीपक ने बताया कि मैं मोटी कमाई के झांसे में आ गया। 24 अगस्त 2023 से लेकर 8 अप्रैल 2024 तक कई हिस्सों में पवन मीणा को एक करोड़ रुपए दे दिए। इसके बाद कुछ महीनों तक तो पवन संपर्क में रहा। जल्द ही पेमेंट डबल-ट्रिपल करने की बात कहता था, लेकिन बाद में धीरे-धीरे उसने फोन उठाने बंद कर दिए। पुलिस लाइन से भी गायब रहने लगा। कई महीनों से तो उसका कोई अता-पता ही नहीं लगा। कई पुलिसकर्मियों से इकट्ठा कर दिए थे 1 करोड़ दीपक ने बताया- पवन मीणा को जो 1 करोड़ रुपए दिए थे वो मेरे अकेले के नहीं थे। मेरे तो 22 लाख रुपए ही थे, बाकी थाने के दूसरे पुलिसकर्मियों के थे। कई लोगों ने मेरे कहने पर तो कइयों ने पवन से सीधी जान-पहचान के कारण इन्वेस्टमेंट के लिए दे दिए। किसी के पास पैसे नहीं थे तो पवन ने शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया। उसे पुलिसकर्मियों के फोन से प्री-अप्रूव्ड पर्सनल लोन मंजूर करवाकर हाथों हाथ पैसा ट्रांसफर करवा लिया। एक साथी ने तो घर से माता-पिता की सेविंग लाकर दी। कुछ ने तो ब्याज पर उठाकर और अपनी गांव की प्रॉपर्टी तक बेचकर पवन को रुपए दिए थे। खुद के ही थाने में दर्ज नहीं हुआ मामला, कोर्ट जाना पड़ा कॉन्स्टेबल दीपक ने बताया कि उसने आरोपी कॉन्स्टेबल पवन मीणा की इस कारस्तानी की शिकायत क्लॉक टावर एसएचओ और अजमेर एसपी से की थी, लेकिन न तो मामला दर्ज हुआ और न ही कोई कार्रवाई हुई। इसके बाद अब उसने कोर्ट के जरिए मामला दर्ज करवाया है। इस मामले की जांच कर रहे ASI भरत सिंह ने बताया कि अब तक की पड़ताल में कई पुलिसकर्मियों से ठगी का पता चला है। आरोपी कॉन्स्टेबल पवन मीणा और उसके भाई कुलदीप मीणा के खिलाफ दुराचरण संबंधी रिपोर्ट बनाकर अधिकारियों को भिजवा रहे हैं। वहीं मामले की तफ्तीश अभी चल रही है। सिविल लाइंस थाना : 20 करोड़ की ठगी आरोपी कॉन्स्टेबल पवन मीणा के खिलाफ 5 महीने पहले अजमेर के सिविल लाइन पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मी वीपी सिंह ने 20 करोड़ रुपए की ठगी की एफआईआर दर्ज करवाई थी। किशनगढ़ के मदनगंज थाने में पोस्टेड पुलिसकर्मी वीपी सिंह ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि पवन मीणा मेरा भी बैचमेट था। अक्सर मुझसे मिलने आता था। हाईप्रोफाइल लाइफस्टाइल दिखाता था। पूछने पर बताता था कि उसका यूनिक मेडिसिन का बिजनेस है, जिसकी बहुत ज्यादा रिटेल डिमांड है। इस बिजनेस में उसकी मोनोपोली चलती है। इसके अलावा उसकी एक नर्सरी है, जहां से वो पौधे तैयार कर विदेशों में महंगे दाम में बेचता है। विदेशी पौधों को वहां से सस्ते में खरीद कर इंडिया में महंगे दामों में बेचता है। पवन दो-तीन बार गंगापुर सिटी में मेरे गांव आया। तब उसने बताया कि कई पुलिसकर्मी साथियों और अन्य लोगों ने करोड़ों रुपए इन्वेस्ट कर रखे हैं। वो सब बढ़िया कमा रहे हैं। तुम्हें भी इन्वेस्ट करना चाहिए। उसकी इन बातों से मैं झांसे में आ गया। पहली बार में 9 लाख रुपए इन्वेस्टमेंट के लिए दिए। एक बार मांगने पर 9 लाख रुपए के बदले 13 लाख रुपए देते हुए बोला- 4 लाख रुपए तुम्हारी कमाई। इससे उस पर पक्का विश्वास हो गया। अगली बार दोबारा में उसे अपने नाम लोन उठाकर 17 लाख रुपए दे दिए। इस बार पैसों का रिटर्न मांगने पर बहाने करने लगा। कभी कहता विदेश में हूं तो कभी कोई बहाना। कुछ दिन बाद नंबर बंद आने लगा। जब हमने पड़ताल की तो पता चला कि पवन ने मेरे जैसे कई पुलिस वालों और दूसरे सिविलियन लोगों से भी करोड़ों रुपए ले रखे हैं। हर किसी को उसने अलग-अलग स्कीम और बिजनेस बता रखे थे। जब पवन की ये हकीकत मेरे सामने आई तो पैरों तले जमीन खिसक गई। ढूंढने के लिए गांव तक गए पवन पुलिस लाइन से गायब रहने लगा था। आखिर में उसे ढूंढते हुए करौली में उसके गांव कोटरा, डेहर गए। वहां उसके पिता और एक बड़े भाई ने बताया कि उन्हें पवन का कुछ पता नहीं है। गांव में अन्य लोगों से पता चला कि पुलिस की नौकरी लगने से पहले पवन ने गांव में भी कई लोगों को ठगा था, लेकिन तब गांव वालों के दबाव के चलते उसके घरवालों ने अपनी जमीन बेचकर पैसे चुकाए थे। 20 पुलिसकर्मी आए सामने, फिर करवाई FIR वीपी सिंह ने बताया कि अजमेर वापस पहुंचने पर पवन की ठगी का शिकार हुए कुछ दूसरे पुलिसकर्मियों का पता चला। कई तो सामने नहीं आना चाहते थे, लेकिन करीब 20 पुलिसकर्मी तैयार हुए। सबने मिलकर तत्कालीन अजमेर एसपी को आपबीती बताई और उनके समक्ष कॉन्स्टेबल पवन के खिलाफ अपनी मौखिक शिकायत दी। एसपी के निर्देश पर कॉन्स्टेबल पवन मीणा के खिलाफ 29 अक्टूबर 2024 को सिविल लाइन थाने में एफआईआर दर्ज की गई। उसी FIR में बाकी पीड़ितों को भी क्लब कर दिया गया था। आरोपी के खिलाफ जुर्म साबित अजमेर नॉर्थ सीओ रूद्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि इस मामले में पुलिस इन्वेस्टिगेशन पूरी हो गई है। आरोपी कॉन्स्टेबल के खिलाफ जुर्म प्रमाणित मान लिया गया है। फिलहाल आरोपी कॉन्स्टेबल पवन मीणा फरार चल रहा है। उसे पकड़ने के लिए एडिशनल एसपी सिटी हिमांशु जांगिड़ के निर्देश पर स्पेशल टीम बनाई गई है। जल्द ही उसे पकड़ लेंगे।


