आलीराजपुर जिले के जोबट के नजदीक बलेड़ी गांव में मिशन D-3 को लेकर कार्यशाला हुई। इसमें आसपास के 20 से अधिक गांवों से पटेल, चौकीदार, सरपंच सहित 1000 लोगों ने देजा, दारू और डीजे के बढ़ते प्रभाव को रोकने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे कैरम जमरा ने कहा- जिस तरह फूटी हुई बाल्टी से कुएं का पानी नहीं निकाल सकते, वैसे ही समाज को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए डीजे, दारू और देजा को कम किए बिना आर्थिक रूप से सक्षम नहीं बना सकते। आदिवासियों को शादी के बाद अत्यधिक कर्ज झेलने की वजह से घर छोड़कर गुजरात जाना पड़ता है। इसलिए कर्ज मुक्त समाज बनाने का संकल्प लेने की बात कही। कार्यक्रम को क्षेत्रीय भाषा में संबोधित किया गया। इसमें कई उदाहरण देकर आदिवासी समाज के संपूर्ण क्षेत्र में एक समान दहेज करने के अलावा डीजे एक या दो से अधिक नहीं बुलाने और विदेशी शराब पर प्रतिबंध करने की अपील की। कार्यक्रम को आयोजन समिति के जिला अध्यक्ष मालसिंह तोमर, डॉ. दीपेंद्र जमरा, डॉ. जितेंद्र मोरी बलोला, जिला पंचायत सदस्य हजरी अजनार, रिंकूबाला डावर, अंगार सिंह चौहान, भीकू चौहान, माया बारिया, मोते सिंह भूरिया, प्रताप मौर्य, छगन सिंह मंडलोई और रमेश डावर ने संबोधित किया। कार्यक्रम में ये नियम बने आदिवासी समाज के भील समाज में अलग-अलग गांवों में 5 लाख, 6 लाख का दहेज तय किया जाता था, जिसे घटाकर 2 लाख 50 हजार रुपए करने पर सहमति बनी। लड़की अगर भागकर शादी करती है तो 30 हजार रुपए गुनाह तय किया गया। डीजे को लेकर दूल्हे के घर एक व दुल्हन के घर बाराती डीजे सहित दो डीजे करने की छूट रहेगी। शादीवाले घर पर विदेशी शराब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।


