11वीं सदी में भीलवाड़ा के शासक रहे भलराज भील की अश्वारोही 6.50 फीट की प्रतिमा का अनावरण

भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा नगर निगम परिसर में रविवार दोपहर तीन बजे 11वीं सदी के भीलवाड़ा शासक राजा भलराज भील की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इसके साथ ही शास्त्रीनगर स्थित बंशीलाल पटवा सामुदायिक भवन का लोकार्पण समारोह भी आयोजित हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पार्षद और भील समाज के लोग मौजूद रहे। समारोह के मुख्य अतिथि नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा रहे। चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, विधायक अशोक कोठारी, उदयलाल भड़ाणा, गोपीचंद मीणा और महापौर राकेश पाठक ने प्रतिमा का अनावरण और सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। इस मौके पर मंत्री खर्रा ने कहा कि देश के इतिहास में सबसे कठिन संघर्ष आदिवासी समाज ने किया, लेकिन आजादी के बाद उन्हें वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि आदिवासी 5 नायकों के योगदान को भावी पीढ़ी तक नहीं पहुंचाया गया। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई शिक्षा नीति में विदेशी आक्रांताओं के बजाय अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सच्चे योद्धाओं के बारे में बच्चों को पढ़ाया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी को असली नायकों की पहचान मिलेगी। विधायक भडाणा ने जोधड़ास में भील समाज के भूखंड का कब्जा 15 दिन में दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही भूखंड के विकास के लिए विधायक मद से 15 लाख रुपए देने की घोषणा भी की। कार्यक्रम के दौरान राजसमंद की आठ वर्षीय विष्णुप्रिया ने आदिवासी गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम का आभार सांवर लाल भील ने व्यक्त किया। इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त हेमाराम चौधरी, पूर्व उपसभापति मुकेश देबू सहित नगर के सभी पार्षद उपस्थित रहे। पहले शासक थे राजा भलराज इतिहासकारों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार 11वीं सदी में भील राजा भलराज ने इस क्षेत्र को बसाया। इसी के साथ भीलवाड़ा की पहचान और नामकरण की नींव पड़ी। माना जाता है कि भलराज भीलवाड़ा के प्रथम ज्ञात भील राजा थे। भीलवाड़ा नाम की उत्पत्ति ‘भील + बड़ा’ से हुई, जिसका अर्थ है भीलों का बड़ा क्षेत्र। समय के साथ यही नाम भीलवाड़ा के रूप में प्रचलित हो गया। भलराज के शासनकाल में आर्थिक गतिविधियां भी विकसित हुईं। इस क्षेत्र में ‘भिलाड़ी’ नामक सिक्कों का प्रचलन था, जिन्हें भील शासकों की मुद्रा माना जाता है। आज भी इतिहासकार इन सिक्कों को भील राजवंश की आर्थिक ताकत का प्रतीक मानते हैं। समारोह में विष्णु प्रिया के नृत्य की प्रस्तुति को कैमरे में कैद करते शहरवासी। राजा भलराज भील की मूर्ति अनावरण करते अतिथि। शास्त्रीनगर में पुरानी पुलिस चौकी के पास नवनिर्मित शास्त्रीनगर सामुदायिक भवन करीब 5.50 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया है। यह प्रदेश का पहला मल्टीस्टोरी सामुदायिक भवन है, जिसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। भवन में कुल छह बड़े हॉल और 20 कमरे बनाए गए हैं। सभी कमरे एसी सुविधा के साथ अटैच टॉयलेट-बाथरूम से युक्त हैं, जिससे यहां होने वाले सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक आयोजनों में लोगों को बेहतर सुविधा मिलेगी। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार सामुदायिक भवन का किराया शीघ्र ही तय किया जाएगा। तीर-कमान को सजाकर जुलूस निकाला राजा भलराज भील की प्रतिमा के अनावरण को लेकर भील समाज में उत्साह देखने को मिला। रविवार को समाज के लोग सुखाड़िया सर्किल से जुलूस के रूप में नगर निगम परिसर पहुंचे। पूरे रास्ते राजा भलराज के जयकारों से माहौल गूंजता रहा। जुलूस में शामिल कई युवाओं और बुजुर्गों ने पारंपरिक रूप से तीर-कमान को सजाकर हाथों में थाम रखा था, जो भील समाज की वीर परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक रहा।

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