पंचायत चुनाव नजदीक आने के साथ ही ग्राम पंचायतों में गुटबाजी के चलते वित्तीय अनियमितताओं और घोटालों की शिकायतों के अंबार लग गए हैं। जिले की 366 ग्राम पंचायतों में से 11 की ऑडिट में करीब डेढ़ करोड़ रुपए के गबन के मामले उजागर हुए हैं। जिला परिषद और पंचायत समितियों में अधिकारी इन दिनों पंचायत राज चुनाव की तैयारी करने के बजाय अनियमितताओं की शिकायतों की जांच में उलझे हुए हैं। जिला परिषद में दो साल में करीब 300 शिकायतें आई थीं, जिनमें से 150 ही पेंडिंग थीं। हालात ये है कि इन छह महीनों ही 50 नई शिकायतें मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पास और आ गई हैं। जिला परिषद में अब 200 शिकायतों की जांच चल रही है। इनमें अधिकांश शिकायतें आपसी गुटबाजी को लेकर करनी बताई जा रही हैं। कहीं ग्राम सेवक तो कहीं सरपंच या उप सरपंच पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। नरेगा में भुगतान और जमीन के पट्टे नहीं बनाने जैसी शिकायतें भी शामिल हैं। भास्कर पड़ताल में 11 ग्राम पंचायतों की ऑडिट से एक करोड़ 49 लाख 31 हजार 868 रुपए के गबन के मामले सामने आए हैं। इनमें से कुछ में रिकवरी हुई तो कुछ में नहीं हो पाई। पुलिस थानों से लेकर कोर्ट तक मामले लंबित चल रहे हैं। रिकवरी के लिए अब संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंच और ग्राम सेवकों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। इनमें 1997, 2009-10 से लेकर 2023 तक के मामले शामिल हैं। पंचायतों की ऑडिट स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की ओर से की गई थी। मामले संभागीय आयुक्त तक पहुंचे हुए हैं। जिले में 366 ग्राम पंचायतें, नापासर में घपले सबसे ज्यादा, फरवरी 2025 में खत्म हो रहा है पंचायतों का कार्यकाल, अब प्रशासक लगाए जाएंगे पंचायतों में प्रशासक लगाने की तैयारी पंचायतीराज के चुनाव अगले साल प्रस्तावित हैं। पंचायतों का कार्यकाल फरवरी 2025 में पूरा हो जाएगा। इस बार निकाय और पंचायत चुनाव साथ-साथ कराने पर सरकार विचार कर रही है। पंचायतों को कार्यकाल पूरा होते देख प्रशासक लगाए जाएंगे। ग्राम पंचायतों की ऑडिट रिपोर्ट 1. पांचू में 2021 से 23 तक की ऑडिट में पारवा में 24 लाख और नाथूसर में 20 लाख का गबन माना गया है। इन दोनों ग्राम पंचायतों ने अपना रिकॉर्ड ही अब तक पेश नहीं किया है। 2. कालू ग्राम पंचायत में वर्ष 2015 से 2018 तक की ऑडिट में 88 हजार रुपए का गबन माना गया था। जांच के दौरान इस राशि की रिकवरी हो चुकी है। 3. लूणकरणसर के महाजन में 2015-16 की ऑडिट में 5.98 लाख रुपए का गबन उजागर हुआ था, जिसमें 1.34 लाख की वसूली सरपंच और ग्राम सेवक से हो चुकी है। इस प्रकरण में पुलिस में एफआईआर भी हुई। अब प्रकरण कोर्ट में लंबित है। 4. खाजूवाला में वर्ष 2008-09 में सात लाख रुपए का गबन हुआ था। पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज हुई। आरोपी सरपंच और ग्राम सेवक दोनों की ही मृत्यु हो चुकी है। इस रकम की रिकवरी नहीं हो पाई। 5. बीठनोक में 2008-09 की ऑडिट में 4.32 लाख और 2011-12 की ऑडिट में 70 हजार रुपए का गबन उजागर हुआ था। रिकवरी अब तक पेंडिंग है। 6. कोलायत में 2009-10 की ऑडिट में 13 लाख रुपए का गबन उजागर हुआ था। रिकवरी अब तक नहीं हो पाई। 7. बरसलपुर में 2008-09 की ऑडिट में 65 लाख रुपए के गबन का मामला एसीबी कोर्ट में पेंडिंग है। ग्राम सेवक की मृत्यु हो चुकी है। 8. नापासर में 1.43 लाख रुपए का गबन 1997-98 में हुआ था, जिसकी रिकवरी हो गई। इसी प्रकार कालासर में 60 हजार की रिकवरी की गई है। मूंडसर में 1.87 लाख रुपए के गबन के मामले में ग्राम सेवक की वेतन वृद्धि रोक दी गई है। नापासर ग्राम पंचायत में डीजल घोटाला सामने आया है। पूर्व ग्राम विकास अधिकारी अभयकरण बीठू के कार्यकाल में 9 लाख 72 हजार 114 रुपए का डीजल ट्रैक्टरों में भरवाया गया था, जबकि वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी सुरेश मेघवाल के कार्यकाल में डीजल पर मात्र दो लाख 71 हजार 754 रुपए ही खर्च हुए हैं। अभयकरण के कार्यकाल में प्रतिदिन 1226 रुपए और मेघवाल के कार्यकाल में प्रतिदिन का औसत खर्च 572 रुपए आंका गया है। जिला परिषद सीईओ सोहनलाल की ओर से गठित जांच दल ने माना कि अभयकरण के कार्यकाल में अधिक डीजल खर्च कर अनियमितता बरती गई है। ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड की जांच में अधिकतर बिलों पर केवल सरपंच के ही साइन मिले हैं। ट्रैक्टरों में टंकी की क्षमता से अधिक तेल भरवाने के भी बिल हैं। कुछ बिलों का 64 हजार 579 रुपए का भुगतान ग्राम विकास अधिकारी अभयकरण को किया गया, जबकि उन पर ‘पेड बाई मी’ नहीं लिखा गया। मजे की बात ये है कि ग्राम पंचायत में लालचंद नामक कोई सफाई कर्मचारी नहीं है,जबकि उसके नाम से डीजल की पर्ची कटी हुई है। तेल जरीकन में भरवाने की बात भी सामने आई है। ड्राइवरों के पास लाइसेंस तक नहीं मिले। ट्रैक्टरों की लॉग बुक का संधारण तक नहीं किया जा रहा था। ट्रैक्टर नंबर आरजे 07 आरई 7076 में एक ही दिन में दो बार 87.23 लीटर डीजल भरवाया गया। जांच टीम में शामिल अतिरिक्त विकास अधिकारी मोहनलाल और सहायक लेखाधिकारी ओम प्रकाश चौधरी ने माना कि एक ही कार्य क्षेत्र में पूर्व ग्राम विकास अधिकारी के समय में दो गुना से अधिक डीजल की खपत हुई, जबकि वर्तमान ग्राम विकास अधिकारी के कार्यकाल में आधे से भी कम तेल की खपत हुई है। एक ट्रैक्टर ग्राम पंचायत का नहीं होने के बाद भी उसमें रोज 30-40 लीटर डीजल भरवाया गया है। जिला परिषद सीईओ ने डीजल भरवाने में अनियमितताओं का प्रकरण भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज कराने के आदेश बीकानेर पंचायत समिति के विकास अधिकारी को दिए हैं। गौरतलब है कि नापासर के ही रामचंद्र पूनिया ने सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ ट्रैक्टरों में डीजल भरवाने में भ्रष्टाचार की शिकायत जून में की थी।


