12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर चंबल संग्रहालय की ओर से चंबल मैराथन का पांचवां संस्करण आयोजित होगा। इसमें धावकों के लिए रोमांचक दौड़ होगी। इसके जरिए उन्हें चंबल क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संपदा के बारे में बताया जाएगा। चंबल मैराथन का 42.195 किमी लंबा रूट इटावा के डॉल्फिन सफारी, सहसो से शुरू होकर पंचनद संगम पर समाप्त होगा। यह मार्ग बल्लो गढ़िया, हरके पुरा, चंबल आश्रम हुकुमपुरा और जगम्मनपुर जैसे ऐतिहासिक स्थलों से गुजरते हुए धावकों को चंबल की प्राकृतिक सुंदरता से परिचित कराएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल
चंबल संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने बताया, यह आयोजन चंबल क्षेत्र के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास है। आयोजन का उद्देश्य न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देना है, बल्कि चंबल के गांवों और घाटियों की विशिष्टताओं को उजागर करना भी है। मैराथन मार्ग धावकों को नदियों, सरसों के पीले फूलों, औषधीय पौधों से भरे जंगल और चंबल की घाटियों में मगरमच्छों और डॉल्फिन की अठखेलियों का अद्भुत अनुभव प्रदान करेगा। पंचनद संगम का अनोखा नजारा, जहां चंबल, यमुना, सिंध, पहुंज और क्वारी नदियां मिलती हैं, इस दौड़ का आकर्षण होगा। सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का प्रदर्शन
डॉ. राना ने कहा कि चंबल मैराथन सिर्फ दौड़ नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक महत्व को भी प्रस्तुत करेगा। बीहड़ों का यह इलाका, जो कभी डाकुओं की शरण स्थली था, अब एक पर्यटन आकर्षण बन रहा है। देश भर के धावकों के बीच चंबल मैराथन को लेकर उत्साह है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिल रही है। प्रतिभागियों को प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ स्थानीय सांस्कृतिक झलक भी देखने को मिलेगी। आयोजन को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और स्थानीय समुदाय से सहयोग की अपील की गई है। राना ने कहा कि आयोजन चंबल क्षेत्र के विकास और पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की पहल है। देखिए तस्वीरें…


