12 साल पहले बांस के आशियाने में शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना की हुई थी शुरुआत, मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा अनुष्ठान 20 फरवरी से

खुशबू सिंह रांची पहाड़ों के बीच स्थापित श्री नागेश्वर धाम मंदिर का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। सुंदर नगर के चटकपुर रोड, कमड़े स्थित इस मंदिर की स्थापना करीब 12 वर्ष पूर्व एक छोटे से बांस के आशियाने में शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना के साथ की गई थी। स्थानीय निवासी सुशील कुमार सिन्हा ने बताया कि श्रद्धालुओं के सहयोग से समय के साथ मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढ़ा और अब यह फरवरी 2026 में पूर्ण होने जा रहा है। मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा समारोह 20 फरवरी से आयोजित किया जाएगा। देवघर की परंपरा के अनुरूप इस धार्मिक आयोजन को रांची में स्थापित करने का प्रयास किया गया है। यहां तीन अलग-अलग मंदिर बनाए गए हैं, पहला भगवान शिव के लिए, दूसरा माता पार्वती के लिए और तीसरा भगवान हनुमान के लिए। सामान्यतः भगवान शिव और माता पार्वती एक ही मंदिर में विराजमान होते हैं, लेकिन इस मंदिर की विशेषता है कि दोनों के लिए अलग-अलग मंदिर निर्मित किए गए हैं। भगवान शिव और माता पार्वती के मंदिर के शिखर को लाल-पीले रंग के धागों या कपड़े से गठबंधन किया जाएगा, जो अनवरत चलता रहेगा। यहां 2 फीट ऊंचा शिवलिंग, 4 फीट ऊंची माता पार्वती की प्रतिमा और 8 फीट ऊंची भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके अतिरिक्त नंदी जी, भगवान गणेश और कार्तिकेय महाराज भी विराजमान होंगे। मंदिर के समीप धर्मशाला व विवाह मंडप के साथ एक विशाल यज्ञ कुंड है। मंदिर को अंतिम रूप देने का कार्य हजारीबाग के कारीगरों द्वारा किया जा रहा है। हर साल महाशिवरात्रि पर होगा गठबंधन… माता पार्वती की मंदिर पश्चिम दिशा की ओर और भगवान शिव का मंदिर पूर्व दिशा की ओर स्थित है। 30 फीट की ऊंचाई पर मंदिर का निर्माण किया गया है। कमेटी द्वारा साल में एक बार महाशिवरात्रि के अवसर पर गठबंधन कराया जाएगा। भक्त अपने संकल्प के अनुसार साल में कभी भी गठबंधन करा सकेंगे। शालिनी वैद्य, ज्योतिष शिव मंदिर की ऊंचाई – 51 फीट मां पार्वती मंदिर की ऊंचाई – 31 फीट शिव और माता मंदिर की दूरी- 55 फीट देवघर में माता पार्वती मंदिर को पवित्र लाल धागे से मुख्य शिव मंदिर के साथ जोड़ा गया है, जो शिव-शक्ति के अविभाज्य मिलन का प्रतीक है। ज्योतिष के अनुसार, यह गठबंधन वैवाहिक सुखमय, अटूट विश्वास और आध्यात्मिक एकता के लिए किया जाता है, जो भक्तों के जीवन में प्रेम, समृद्धि और सामंजस्य लाता है। पंडित संजय पाठक के अनुसार, इस क्षेत्र में नाग देवता का निवास माना जाता है। पुराने समय से यहां नाग-नागिन देखे जाते रहे हैं। कई बार एक साथ अनेक नाग देवता दिखाई दिए थे। यह बात 50 साल से भी पुरानी है। लगातार दर्शन होने के कारण यहीं ग्रामीणवासियों व श्री नागेश्वर धाम समिति के ओर से यह निर्णय लिया गया कि मंदिर बनाया जाए। प्रारंभ में जंगल साफ कर बांस का छोटा मंदिर बनाया गया और पूजा शुरू हुई। बाद में पक्का मंदिर निर्माण कार्य आरंभ हुआ। वर्ष 2014 में नींव रखी गई और इसके बाद मंदिर का निर्माण धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया। सावन, महा शिवरात्रि सहित अन्य पर्व-त्योहारों पर नाग देवता के दर्शन होने की मान्यता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। कई लोगों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिला है। वर्ष 2018 में मंदिर में पहली बार महाशिवरात्रि की पूजा की गई। इसके बाद चटकपुर से शिव बारात मंदिर तक आने लगी। तब से हर वर्ष महाशिवरात्रि का आयोजन धूमधाम से किया जा रहा है।

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