झुंझुनूं में 120 फीट गहरे संकड़े कुएं में 5 दिन से गिरी बिल्ली को सोमवार देर रात सफल रेस्क्यू किया गया है। कुएं से निकलने के बाद बिल्ली मैट पर लेटी रही। रेस्क्यू करने वाले मेंबर ने उसे छुआ तो दौड़ पड़ी। गुरुवार 6 मार्च को गिरी बिल्ली को बचाने के लिए गांव वाले 5 दिन से रस्सी के सहारे दूध-रोटी पहुंचा रहे थे। वे बिल्ली को नहीं निकाल सके तो प्राणी मित्र सेवा समिति के डॉ. अनिल खीचड़ से मदद मांगी। सोमवार रात 11 बजे बिल्ली को कुएं से निकाल लिया गया। मामला झुंझूनूं के सदर थाना इलाके के गांव सोती का है। जानकारी के मुताबिक- शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर मंड्रेला रोड पर स्थित सोती गांव में श्रीबालाजी मंदिर के पास पुराने कुएं में बिल्ली गिर गई थी। बालाजी मंदिर के पुजारी बाबूलाल और आसपास के लोगों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने बिल्ली को बचाने की मुहिम शुरू की। पुजारी बोले- पहले अपने स्तर पर कोशिश की पुजारी बाबूलाल सैनी ने बताया- मंदिर के पास पुराना कुआं है। यह काफी गहरा है। कुएं में बिल्ली की आवाज आ रही थी। इसकी जानकारी ग्रामीण गौतम सैनी और यशपाल को दी। पूरा गांव बिल्ली को बचाने की कोशिशों में जुट गया। हमने रस्सी, जाल और जुगाड़ से बिल्ली को निकालने की कोशिश की। सफलता नहीं मिली। यशपाल रोजाना बिल्ली के लिए दूध-रोटी लाता और कुएं में जाल से उतारता था। हम बिल्ली के लिए प्रार्थना कर रहे थे। उसे जुगाड़ से निकालने की कोशिश की लेकिन बिल्ली बाहर नहीं निकल सकी। फिर मैंने नयासर (झुंझुनूं) में प्राणी मित्र सेवा समिति के डॉक्टर अनिल खींचड़ से मदद मांगी। एंबुलेंस और टीम लेकर रेस्क्यू के लिए पहुंचे डॉ. अनिल खीचड़ ने बताया- सूचना मिलने पर मैं टीम और एंबुलेंस लेकर सोमवार शाम 5.30 बजे टीम मौके पर पहुंचा। यहां पहले मौका देखा। कुआं पुराना और काफी संकड़ा था। इसमें उतरना खतरे से खाली नहीं था। 120 फीट गहरे कुएं में बिल्ली काफी नीचे फंसी थी। इसे कुएं में बिना उतरे निकालना मुश्किल था। इसलिए बिल्ली को निकालने के लिए सुरक्षित रेस्क्यू ऑपरेशन प्लान किया। रस्सी और बांस से बना मजबूत उपकरण तैयार किया। तय किया एक स्किल्ड रेस्क्यूअर अंकित को रस्सी के सहारे कुएं की गहराई में उतारा जाएगा। बिल्ली 5 दिन से जिंदा थी, इसलिए जहरीली गैस होने का अंदेशा नहीं था। रस्सी से टीम मेंबर को उतारा, टॉर्च से की तलाश सोमवार रात 8 बजे रस्सियों और एक विशेष जाल पर टीम मेंबर अंकित को बैठाकर धीरे-धीरे कुएं में उतारा गया। अंकित ने टॉर्च से बिल्ली को तलाश किया। वहां बिल्ली को नेटपोल (लकड़ी से जुड़े लोहे के आंकड़े) में फंसाया और बिल्ली व अंकित दोनों को धीरे-धीरे ऊपर खींचना शुरू किया। कुछ फीट खींचने में हमें 3 घंटे का समय लग गया। सावधानी इसलिए बरती गई, क्योंकि अगर बिल्ली छूटकर दोबारा कुएं में गिरती तो वह ज्यादा गहराई में चली जाती। आखिर रात 11 बजे सफलतापूर्वक बिल्ली को कुएं से बाहर निकाल लिया गया। बिल्ली के बाहर आने की सूचना पर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। सुरक्षित और स्वस्थ है बिल्ली डॉ. अनिल खीचड़ ने बताया- बिल्ली को कुएं से निकाल पर मैट पर लिटाया। रेस्क्यूअर के छूने पर वह फौरन उठकर दौड़ने लगी। बिल्ली पूरी तरह स्वस्थ है और खतरे से बाहर है। उसकी आवश्यक देखभाल की गई और भोजन के साथ दवाएं दी गई। इस पूरे अभियान में ग्रामीणों की जागरूकता और संवेदनशीलता भी काबिले-तारीफ रही। बिल्ली को बचाने के लिए वे लगातार प्रयासरत रहे। जानवरों के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था डॉ. अनिल खीचड़ ने बताया- हमारी टीमें गली-मोहल्लों में जाकर बेसहारा पशु-पक्षियों का इलाज करती हैं। घायल पशुओं का नयासर गांव में आरएस फार्म पर इलाज करते हैं। यहां कबूतर, मोर, बाज, तीतर, कुत्ते, बिल्ली, हिरण, रोज, बंदर आदि जानवरों का इलाज किया गया है। पक्षियों के रहने के लिए आश्रय स्थल पर पक्षी घर बनाते हैं। घायल-बीमार पशु-पक्षियों को शेल्टर होम ले जाते हैं। पशु-पक्षियों के लिए फ्री एंबुलेंस की सेवा भी देते हैं। करीब 50 किलोमीटर के दायरे में कहीं से भी कोई घायल या बीमार पशु-पक्षी की सूचना मिलती है तो एंबुलेंस की मदद पहुंचाई जाती है।


