13 साल पहले भी राजिम में रामकथा के कई प्रसंग सुनाए थे

भास्कर न्यूज | राजिम राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प एवं महाशिवरात्रि समापन समारोह का मुख्य आकर्षण रहे सुप्रसिद्ध अभिनेता अरुण गोविल, जिन्होंने मुख्य मंच से देर रात रामकथा के प्रेरक प्रसंगों का सरल और भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। रामायण में भगवान श्रीराम की भूमिका निभाकर घर-घर में पूज्य बने अरुण गोविल ने कहा कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला आदर्श मार्ग है। उन्होंने श्रीराम के जन्म, विवाह, वनवास, सुग्रीव से मित्रता, संजीवनी बूटी प्रसंग, रावण से युद्ध और अंततः विजय जैसे प्रसंगों के माध्यम से बताया कि रामायण हमें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि परिवार में कोई भी निर्णय सामूहिक रूप से आपसी सहमति से लेना चाहिए, दांपत्य जीवन में हर परिस्थिति में साथ निभाना चाहिए और भाईचारे का आदर्श लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से सीखना चाहिए। कथा के दौरान उन्होंने “राम सिया राम, सिया राम जय जय राम”, “मंगल भवन अमंगल हारी”, “मेरे झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे जैसे भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि तेरह वर्ष पूर्व भी इसी मंच से उन्होंने रामकथा का प्रसंग सुनाया था और आज पुनः उसी पावन भूमि पर उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। समापन अवसर पर मुख्य मंच पर अन्य कार्यक्रमों की कड़ी में गीतिका ने मधुर बांसुरी वादन की प्रस्तुति दी। “सत्य ही शिव हैं, शिव ही सत्य हैं”, “मुख मुरली बजाए छोटे से श्याम कन्हैया”, “अरे द्वारपालो कन्हैया से कह दो” जैसी धुनों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति महेश वर्मा लोककला मंच की हुई। जिसमें कई कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। समापन अवसर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा कलाकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन निरंजन साहू ने किया।

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