सिविल लाइन इलाके में शुक्रवार 14 साल के छात्र की सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसे से ठीक पहले छात्र और छोटी बहन स्कूल जाने के लिए तैयार होकर रिक्शा का इंतजार कर रहे थे। तय समय पर रिक्शा नहीं आया। दोनों ने करीब 10 मिनट और इंतजार किया, लेकिन तब भी रिक्शा नहीं पहुंचा। इसके बाद छात्र ने स्कूटर निकाल लिया। परिजनों ने मना भी किया, लेकिन छात्र ने कहा कि और इंतजार करेंगे तो स्कूल के लिए देर हो जाएगी और डांट पड़ेगी। भाई-बहन लाभांडी स्थित निवास से स्कूटर लेकर स्कूल के लिए निकले। दोनों तेलीबांधा एसआरपी भगत सिंह चौक होते हुए छत्तीसगढ़ क्लब के पास पहुंचे ही थे कि क्रेन से जोरदार टक्कर हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार स्कूटर क्रेन के बीचों-बीच टकराई, जिससे नंबर प्लेट भी मुड़ गई। टक्कर के बाद स्कूटर सवार दूर जा गिरे। ड्राइवर प्रमोद क्रेन रोक नहीं पाया और वाहन उन्हें रौंदते हुए निकल गया। कुछ देर पहले ही दादा से किया था हंसी मजाक: स्कूल जाने से पहले अंश ने अपने दादा सुरेश से हंसी-मजाक किया। अपने दादा के पास खड़ा होकर अंश अपनी ऊंचाई मापते हुए बोला कि अब वह उनसे बड़ा हो गया है। इस पर दादा ने भी मजाक में कहा कि तू और भी बड़ा होगा। दादा-पोते की इस नोकझोंक के बाद वह स्कूल के लिए निकल गया। दस साल पहले धमतरी से आया परिवार आठवानी परिवार का धमतरी में पैतृक कारोबार है। करीब दस साल पहले सुरेश बेटे सुमीत के साथ रायपुर आ गए थे। सुमीत ठेकेदारी और सप्लाई का काम करते हैं। वह कुछ दिनों से काम के सिलसिले में दिल्ली गए थे। वे आनन-फानन में फ्लाइट से घर पहुंचे। देर शाम अंश का अंतिम संस्कार कर दिया गया। ट्रैफिक की जानकारी देंगे
स्कूलों में छात्र-छात्राओं को ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जाएगी। स्कूल प्रबंधन की बैठक लेकर निर्देश दिए जाएंगे कि 18 साल से कम उम्र के छात्रों को वाहन लेकर आने न दिया जाए। यदि कोई वाहन से आता है तो उसे रोका जाए और उसके परिजनों को बुलाकर समझाया जाए। बिना लाइसेंस बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति न दी जाए।
-डॉ. संजीव शुक्ला, कमिश्नर, रायपुर डराते हैं आंकड़े… सिविल लाइन में 11 मौतें, 90 घायल
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक 2025 में सिविल लाइन इलाके में 114 से ज्यादा घटनाएं हुई हैं, जिनमें पुलिस केस दर्ज हुए हैं। इनमें 11 लोगों की जान गई है, जबकि 90 लोग गंभीर हैं। हर साल सिविल लाइन इलाके में 250 से ज्यादा हादसे होते हैं। 2024 में 90 घटनाओं में 5 की मौत हुई और 60 घायल हुए। 2023 में 89 हादसों में 4 की जान गई। भास्कर एक्सपर्ट- प्रफुल्ल जोशी, ट्रैफिक एक्सपर्ट सख्ती से बच्चों को वाहन चलाने से रोकना चाहिए केंद्रीय शिक्षा बोर्ड से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक नाबालिग छात्रों की ड्राइविंग पर प्रतिबंध लगाया गया है। स्पष्ट निर्देश है कि स्कूल प्रबंधन नाबालिगों को वाहन लेकर आने न दे। इसमें बड़ी जिम्मेदारी परिजनों की है। कम उम्र में बच्चों को वाहन नहीं देना चाहिए। उनमें ड्राइविंग सेंस और नियमों की समझ नहीं होती। परिजनों को सख्ती से बच्चों को वाहन चलाने से रोकना चाहिए। 18 साल की उम्र से पहले नाबालिगों को वाहन नहीं देना चाहिए। इसमें परिजनों पर पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है। यदि परिजन सख्त और गंभीर रहें तो अपने बच्चों की जान बचा सकते हैं। सिविल लाइन की यह घटना बेहद दुखद है। ऐसी घटनाएं माता-पिता को अंदर से तोड़ देती हैं।


