15 को मुख्यमंत्री ने तलब होने पर लाइव-विडियों ग्राफी मांग:पर जालंधर पहुंचे जाखड़ बोले श्री अकाल-तख्त साहिब कुर्सी की गरिमा बनाए रखनी चाहिए

जालंधर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 15 तारीख को श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब किए जाने का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। इस बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से लाइव कवरेज की मांग भी की गई है। इसी मुद्दे पर आज जालंधर पहुंचे भाजपा के पंजाब प्रधान सुनील जाखड़ बोले इस मामले वो कोई बयान नहीं दे सकते। उन्होंने कहा श्री अकाल तख्त साहिब की जत्थेदार की कुर्सी का वो सम्मान करते है। उनके लिए वो कुछ भी नहीं बोल सकते। भगवंत मान के बारे में बोलते हुए कहा वे झूठे है इनका क्या ये तो मै न मानू वाले हैं सुनील जाखड़ ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की कुर्सी पर चाहे कोई भी बैठा हो, हम सभी उसका सम्मान करते हैं। लाइव कवरेज हो या न हो, इस पर वे कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि इस कुर्सी की गरिमा हर हाल में बनाए रखी जानी चाहिए। जाखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान हर छोटे मुद्दे पर स्पेशल सेशन बुला लेते हैं। उन्हें इस मामले पर भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवंत मान से जुड़ी जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, उसकी जांच पंजाब से बाहर की किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जानी चाहिए, ताकि असल सच्चाई लोगों के सामने आ सके। भाजपा प्रधान ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पंजाब के मुख्यमंत्री से डरती है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक कोई ठोस सवाल नहीं उठाते, बल्कि सिर्फ शोर मचाकर सदन से बाहर निकल जाते हैं।इसके साथ ही जाखड़ ने 350 स्वरूपों के मामले पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार को गंभीरता से जांच करानी चाहिए और इसकी वास्तविक सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए। 15 जनवरी को अकाल तख्त साहिब तलब किए गए मुख्यमंत्री भगवंत मान, जानें पूरा मामला… पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब ने 15 जनवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया है। यह समन अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज की ओर से जारी किया गया है। समन में मुख्यमंत्री से हाल ही में उनके द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है, जिन्हें सिख रहित मर्यादा और पंथिक सिद्धांतों के खिलाफ बताया जा रहा है। क्या है पूरा मामला, क्यों किया गया तलब अकाल तख्त और एसजीपीसी से जुड़े सूत्रों के अनुसार आरोप है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने कुछ बयानों में दसवंध (धार्मिक दान) और गोलक जैसे सिख धार्मिक सिद्धांतों पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इसके अलावा सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें मान के सिख गुरुओं की तस्वीरों से जुड़े आचरण पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन वीडियो की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अकाल तख्त के समन में कहा गया है कि इन बयानों और घटनाओं से सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसी कारण मुख्यमंत्री को तलब कर उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके बयान किस संदर्भ में दिए गए थे और उनका वास्तविक आशय क्या था। 328 सरूप विवाद से भी जुड़ा मामला इस पूरे विवाद को 328 पवित्र स्वरूपों (गुरु ग्रंथ साहिब) के लापता होने के मामले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर पहले से ही सरकार और सिख धार्मिक संस्थाओं के बीच तनाव बना हुआ है, जो अब और गहराता नजर आ रहा है। राजनीतिक हलकों में तेज हुई हलचल अकाल तख्त के समन के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वायरल वीडियो और आरोपों की जांच पंजाब से बाहर की एजेंसी से कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके। मुख्यमंत्री भगवंत मान का पक्ष मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि वह अकाल तख्त साहिब के आदेश का पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह 15 जनवरी को अकाल तख्त साहिब में एक विनम्र सिख के रूप में पेश होंगे। न कि केवल एक मुख्यमंत्री के तौर पर। मान ने कहा कि अकाल तख्त की मर्यादा और गरिमा उनके लिए सर्वोपरि है।

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