राज्य में 165 साल पूर्व सबसे पहले अजमेर जिले से मिशनरी की शुरुआत हुई। प्रदेश का पहला मदर चर्च ब्यावर में 1860 में बनाया गया। इसके बाद टॉडगढ़ में 164 साल पहले और अजमेर के आगरा गेट पर 162 साल पहले चर्च बनाए गए। ये चर्च स्कॉटलैंड की नायाब कला के हुनर से बनाए गए। इन चचों से प्रदेश में समाज सेवा करने के लिए मिशनरी ने काम शुरू किया। खारचा गांव में पांच दोस्तों और अजमेर के जीपीओ में कार्यरत एक युवक ने ईसाई धर्म अपनाकर प्रभु यीशु के संदेशों का प्रचार शुरू किया था। क्रिसमस पर पढ़िए ये विशेष स्टोरी। टॉडगढ़ः चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ब्यावर, भीम और राजसमंद के बीच 15 किमी अंदर हरी-भरी पहाड़ियों के बीच बसा है राजस्थान का मिनी माउंट आबू कहलाने वाला कस्बा टॉडगढ़। टॉडगढ़ चर्च का नाम विलियम रॉब मेमोरियल चर्च, चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया है। चर्च का निर्माण कर्नल टॉड के इंग्लैंड जाने के बाद 1850 से 1861 के बीच किया गया। अंग्रेज कैथोलिक मिशनरी विलियम रॉब ने पहाड़ियों पर चर्च, डाकघर और एक जेल बनवाई। कहा जाता है कि ब्यावर के मदर चर्च के कुछ समय बाद ही टॉडगढ़ में चर्च बना। इस चर्च को बने हुए 164 साल हो चुके हैं। जर्जर होने के बाद 2013 में अंबर डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने एक करोड़ की लागत से इसका जीर्णोद्वार कराया था। इस कस्बे का नाम गुर्जरों के सरदार बरसावड़ा के नाम था। इसे बाद में 1819 में उदयपुर के महाराणा ने कर्नल टॉड के कार्यों से प्रसन्न होकर उनके नाम से टॉडगढ़ रख दिया। 1818 में ब्रिटिश इतिहासकार कर्नल टॉड को पश्चिम राजपूताना के राज्यों के लिए राजनीतिक एजेंट नियुक्त करके भेजा गया। उन्होंने यहां राजपूत सरदारों में आपसी झगड़ों को सुलझाने के साथ ही ब्रिटिश अधिकारी के रूप में कार्य किया।


