जबलपुर के बाबा टोला की संकरी गलियों में सुबह के 7 बजे हैं। शराब की तेज गंध हवा में तैर रही है। कुछ घरों के बाहर सन्नाटा है। कुछ दरवाजों पर मृतकों की तस्वीरें टंगी हैं। यही वह मोहल्ला है, जहां जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक की स्थिति में एक-एक कर 17 लोगों की मौत हुई है। कोई बीमारी से तो किसी की अचानक तबीयत बिगड़ जान गई है। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की मौत की जानकारी प्रशासन को लगी तो जांच शुरू की गई। इसकी हाल ही में रिपोर्ट आई है। जिसमें बताया गया है कि बाबा टोला में रहने वाले अधिकतर लोग शराब पीते हैं। माैतों की वजह भी शराब से जुड़ी है। दैनिक भास्कर ने इस बस्ती का जायजा लिया। यहां की लगभग हर गली में किसी न किसी की जान गई हैं। दो जवान बेटों को खोने वाली एक बुजुर्ग महिला का कहना है कि उन्हें खूब समझाती थी। मना करने पर दोनों छिपकर पीने लगे थे। वहीं, यहां की महिलाएं कहती हैं कि सुबह होते ही शराब सामने आ जाती है। जिनकी जान गई, उन्हें रोकते थे, लेकिन लत हमेशा भारी पड़ जाती थी। पढ़िए, यह रिपोर्ट… SP ऑफिस पहुंचे, बोले- हर जगह नशेड़ियों का जमघट
सिंधी कैंप बाबा टोला में रहने वाले स्थानीय लोग मृतकों की तस्वीरों वाला एक पोस्टर लेकर 30 दिसंबर को एसपी ऑफिस पहुंचे थे। उन्होंने एसपी को बताया कि क्षेत्र में 50-50 रुपए में कच्ची और अवैध शराब बिक रही है, लेकिन पुलिस-प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है। आरोप है कि दो साल के भीतर यहां रहने वाले 17 से ज्यादा लोगों की मौत शराब पीने के कारण हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूजा स्थल, आंगनबाड़ी और स्कूल हर जगह शराब पीने वालों का जमघट लगा रहता है। नशा करने वालों के उपद्रव से निकलना दूभर हो गया है। बेटियों, महिलाओं सहित आम जनता का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। शराबियों का जमावड़ा रोड पर ही रहता है। 6 माह में दो सगे भाइयों की मौत
शराब पीने से युवाओं की मौत की पड़ताल करने दैनिक भास्कर की टीम बाबा टोला पहुंची। सामने आया कि अधिकतर घरों में किसी न किसी युवा की मौत हो चुकी है। बुजुर्ग महिला माया बाई चौधरी ने बताया कि उनके दो बेटे थे और दोनों का विवाह हो चुका था। बड़े बेटे अरुण की मौत 26 मार्च 2024 को हुई, जबकि छोटे बेटे सुरेंद्र की 17 अक्टूबर 2025 को मौत हो गई। दोनों मजदूरी करते थे, लेकिन जैसे ही उनके पास पैसे आते, वे शराब में खर्च कर देते थे। सुबह होते ही दोनों शराब के नशे में धुत रहते थे। दोनों बेटे कई सालों से शराब पी रहे थे। पहले बड़ा बेटा शराब पीता था, उसे देखकर छोटे बेटे ने भी पीना शुरू कर दिया। हालात ऐसे हो गए कि मना करने पर दोनों चोरी-छिपे शराब पीने लगे। जानकारी मिलने पर डांटा भी गया, लेकिन तब तक लत लग चुकी थी। दोनों सुबह 7 बजे से शराब पीना शुरू कर देते थे और धीरे-धीरे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। इलाज के लिए डॉक्टर को दिखाया गया तो शराब पीने से मना किया गया, लेकिन दोनों नहीं माने। माया बाई ने बताया कि क्षेत्र में बहुत आसानी से शराब मिल जाती है। यहां 50 रुपए में भी शराब मिल जाती है, जिसके चलते इलाके में रहने वाले अधिकतर युवक शराब पीते हैं। 6 साल से पी रहे थे शराब, कई बार मना किया
बाबा टोला में रहने वाली राजकुमारी चौधरी ने बताया कि उनके देवर प्रदीप चौधरी मजदूरी करते थे। अविवाहित होने के कारण उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। बीते 5-6 वर्षों से वे अत्यधिक शराब पीने लगे थे। कई बार मना किया गया, लेकिन वे नहीं माने। मौत से कुछ माह पहले उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टर को दिखाया गया तो बताया गया कि अधिक शराब पीने से लिवर खराब हो गया है। इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई। 24 घंटे नशे में धुत रहते थे बड़े भाई
अविनाश चौधरी के बड़े भाई की भी कुछ साल पहले मौत हो गई थी। वे घर के बाहर मृत हालत में मिले थे। अविनाश ने बताया कि उनके लिए 24 घंटे शराब पीना और नशे में धुत रहना आम बात हो गई थी। कुछ साल पहले वे गंभीर रूप से बीमार भी पड़े थे। डॉक्टरों ने शराब पीने से मना किया, लेकिन उन्होंने नहीं माना और अंततः उनकी मौत हो गई। अविनाश ने बताया कि अधिक शराब पीने के कारण कुछ साल पहले उनके पिता का भी देहांत हो गया था। पुलिस-आबकारी ने शुरू की थी जांच
बाबा टोला सिंधी कैंप में हुई मौतों की जानकारी मिलते ही पुलिस और आबकारी विभाग ने जांच शुरू की थी। प्रशासन का दावा है कि बाबा टोला में जितनी भी मौतें हुई हैं, वे अत्यधिक शराब पीने और डिप्रेशन में आकर आत्महत्या करने के कारण हुई हैं। कलेक्टर ने दिए निर्देश, दुकान होगी शिफ्ट
30 दिसंबर 2025 को बाबाटोला, सिंधी कैंप में स्थापित शराब दुकान को हटाने के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। मांग की गई थी कि जल्द से जल्द दुकान को बस्ती से हटाया जाए। कलेक्टर ने स्थानीय लोगों की मांग को मानते हुए आबकारी विभाग को निर्देश दिए हैं कि शराब दुकान को वहां से शिफ्ट कर किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाए। एएसपी बोले- अवैध शराब की होगी धरपकड़
एएसपी आयुष गुप्ता का कहना है कि सिंधी कैंप में हुई कुछ मौतों के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। कुछ लोग ज्ञापन लेकर आए थे, जिसके माध्यम से जानकारी दी गई। इसके बाद फौरन हनुमान ताल और बेलबाग थाना पुलिस को अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस-प्रशासन संयुक्त रूप से लगातार अवैध शराब के खिलाफ धरपकड़ करेगा। यह खबर भी पढ़ें… जहरीली शराब से 24 मौत…14 लोगों को 10-10 साल सजा मुरैना जिले के बहुचर्चित छैरा जहरीली शराब केस में कोर्ट ने पांच साल बाद फैसला सुनाया है। जौरा कोर्ट ने 14 आरोपियों को दस-दस साल की सजा सुनाई है। 11 आरोपियों पर 1 लाख 32 हजार रुपए का जुर्माना और 3 आरोपियों पर 1 लाख 7 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…


